नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल चार सप्ताह का समय मिल गया है। हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है, जिसमें जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के केजरीवाल को बरी करने के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ के समक्ष सोमवार को हुई सुनवाई में केजरीवाल की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि मामले में उनकी तरफ से वकालतनामा दाखिल किया जा चुका है और अब विस्तृत जवाब दाखिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई सितंबर में तय कर दी।
ED ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
यह मामला आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं होने से संबंधित दो मामलों का है। ट्रायल कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को इन मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया था।
ED ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए उसके पास पर्याप्त आधार हैं। अब हाई कोर्ट में इस अपील पर आगे की सुनवाई होगी।
केजरीवाल की ओर से क्या हुआ?
सोमवार की सुनवाई के दौरान केजरीवाल की तरफ से वकील ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से वकालतनामा दाखिल कर दिया गया है। उन्होंने मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए चार सप्ताह का समय दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल हाई कोर्ट ने ED की अपील पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। केजरीवाल को अब ED की याचिका का अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।
सितंबर में फिर होगी सुनवाई
चार सप्ताह का समय दिए जाने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई सितंबर तक टाल दी है। अगली सुनवाई में केजरीवाल की ओर से दाखिल जवाब और ED की ओर से दी गई दलीलों पर आगे सुनवाई हो सकती है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाई कोर्ट द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाना केजरीवाल की दोषसिद्धि या बरी होने के फैसले में कोई बदलाव नहीं है। फिलहाल हाई कोर्ट के सामने ED की अपील लंबित है।
क्या है आबकारी नीति मामला?
दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर सामने आए कथित घोटाले में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की थी। इसी मामले में आम आदमी पार्टी और उसके कई नेताओं के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई हुई।
ED की कार्रवाई के खिलाफ अलग-अलग अदालतों में कई याचिकाएं और अपीलें चलती रही हैं। केजरीवाल की गिरफ्तारी और उसके बाद जमानत का मामला भी इसी व्यापक आबकारी नीति प्रकरण से जुड़ा रहा है।
अब मौजूदा विवाद का केंद्र ट्रायल कोर्ट के 22 जनवरी के बरी करने वाले आदेश के खिलाफ ED की अपील है।
अब आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि केजरीवाल की ओर से ED की अपील पर क्या जवाब दिया जाता है और जांच एजेंसी ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए किन कानूनी आधारों पर जोर देती है।
फिलहाल अदालत ने केजरीवाल को चार सप्ताह की मोहलत दी है और मामले की सुनवाई सितंबर 2026 में होगी। इसके बाद ही इस अपील में आगे की कानूनी तस्वीर साफ होगी।
