हरियाली तीज पर घर में बनाएं तीज माता की मिट्टी की प्रतिमा, जानें पूजा विधि और विसर्जन का समय

धर्म-अध्यात्म

नई दिल्ली। हरियाली तीज का पर्व इस वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं घर में ही मिट्टी से तीज माता यानी माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करती हैं।

अगर आप भी घर पर तीज माता की प्रतिमा बनाना चाहती हैं, तो इसे बेहद सरल तरीके से तैयार किया जा सकता है।

कैसे बनाएं मिट्टी से तीज माता की प्रतिमा?

तीज माता की प्रतिमा बनाने के लिए सबसे पहले साफ मिट्टी लें। परंपरा के अनुसार पवित्र स्थान या नदी के किनारे की मिट्टी को शुभ माना जाता है। मिट्टी उपलब्ध न होने पर साफ गीली रेत से भी प्रतिमा बनाई जा सकती है।

मिट्टी में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथ लें। इसके बाद सबसे पहले माता का मुख, फिर हाथ और पैर का आकार तैयार करें। प्रतिमा को सुंदर रूप देने के बाद उसे कुछ समय के लिए सूखने दें।

प्रतिमा सूखने के बाद माता का श्रृंगार किया जाता है। आंखों में काजल और होंठों पर आलता लगाया जा सकता है। इसके बाद माता को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

परंपरा के अनुसार तीज माता को हरे रंग की चोली और लाल रंग की साड़ी पहनाना शुभ माना जाता है।

इस तरह करें तीज माता की स्थापना

पूजा से पहले घर में जिस स्थान पर माता की स्थापना करनी है, उसे अच्छी तरह साफ कर लें। वहां लकड़ी का पाटा रखें और उस पर लाल या साफ कपड़ा बिछाएं।

इसके बाद तीज माता की प्रतिमा स्थापित करें। साथ में छोटा पार्थिव शिवलिंग भी रखा जा सकता है। पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें आम के पत्ते रखें और ऊपर श्रीफल रखें।

तीज माता को क्या चढ़ाएं?

पूजा के दौरान माता को श्रद्धा के साथ विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इनमें—

  • गुड़हल के फूल
  • इत्र
  • पंचामृत
  • मालपुआ
  • भीगे हुए चने
  • हरी सब्जियां
  • बेलपत्र
  • 16 श्रृंगार की सामग्री
  • हरी चुनरी

शामिल की जा सकती हैं।

पूजा सामग्री अर्पित करने के बाद शिव-पार्वती की आरती करें और सुखी वैवाहिक जीवन तथा अखंड सौभाग्य की कामना करें।

तीज माता के विसर्जन की परंपरा

पाठ में दी गई जानकारी के अनुसार, व्रत के पारण के बाद शाम 5:28 बजे तीज माता के विसर्जन की बात कही गई है। हालांकि, पूजा और विसर्जन का समय स्थानीय पंचांग एवं स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

मिट्टी की प्रतिमा होने के कारण पर्यावरण की दृष्टि से उसे घर के गमले या मिट्टी में विसर्जित करना बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि परंपरा के अनुसार जल में विसर्जन किया जाता है, तो स्थानीय नियमों और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का ध्यान रखें।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पर्व है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।

NEWS FOR ACTION BHARAT

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *