लंदन: संत संसद के अंतर्गत लंदन में आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सनातन सम्राट जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने विश्व एकीकरण, मानवता और शांति को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के जरिए ही पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधा जा सकता है।
🌍 युद्ध नहीं, मानवता के लिए हो संघर्ष
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि आज दुनिया को युद्ध और संघर्ष की नहीं, बल्कि पारस्परिक सहयोग, भाईचारे और मानवता की आवश्यकता है। यदि लड़ना ही है तो गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, अन्याय, अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ लड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्व के सभी राष्ट्रों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को रोटी, कपड़ा, मकान और विकास के समान अवसर उपलब्ध हो सकें।
☢️ परमाणु हथियारों की होड़ पर जताई चिंता
स्वामी जी ने कहा कि आज पूरा विश्व बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है और परमाणु हथियार मानवता के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में इतनी प्रगति के बावजूद राष्ट्र आज भी ‘मेरा-मेरा’ की संकीर्ण सोच में उलझे हुए हैं।
उन्होंने रंगभेद, लिंग भेद, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
🕉️ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से जुड़ेगा पूरा विश्व
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि भारत के ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दिया था। इसका मूल भाव है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
उन्होंने कहा कि इसी विचारधारा के आधार पर विश्व को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। उनका आह्वान था कि कोई व्यक्ति गरीब, भूखा या अशिक्षित न रहे और सभी को विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
🌏 अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन संघर्ष का किया उल्लेख
स्वामी जी ने दुनिया में चल रहे युद्धों को समाप्त करने की अपील की। उन्होंने अमेरिका-ईरान संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्चस्व की होड़ में पूरी मानवता को संकट में डालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि हथियारों की होड़ और शक्ति प्रदर्शन से दुनिया में भय और तनाव का वातावरण बन रहा है। इससे बाहर निकलने के लिए मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
🙏 धर्मगुरुओं से विश्व को जोड़ने का आह्वान
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने विश्व के सभी धर्मगुरुओं से मानवता को जोड़ने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राजनेता और सरकारें अपने-अपने एजेंडे पर काम कर रही हैं, उसी प्रकार धर्मगुरुओं को भी विश्व शांति, एकता और मानवता की सुरक्षा को अपना प्रमुख एजेंडा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं की भूमिका केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें मानवता और विश्व शांति के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
🕊️ बिना पासपोर्ट दुनिया में आने-जाने की कल्पना
स्वामी जी ने एक ऐसे विश्व की कल्पना रखी, जहां लोगों को बिना पासपोर्ट की बाध्यता के दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आने-जाने और रोजगार करने की स्वतंत्रता मिले।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पक्षी बिना किसी सीमा के एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचरण करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी दुनिया में स्वतंत्र रूप से विचरण और विकास के अवसर मिलने चाहिए। उनका मानना है कि इससे वैश्विक स्तर पर असमानता और भूख जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है।
🇮🇳 मानवता को सर्वोपरि रखने का संदेश
संत संसद के दौरान स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि विश्व की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया जाए। उन्होंने शांति, समानता, सहयोग और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को विश्व एकीकरण का आधार बताया।
उन्होंने विश्व के सभी राष्ट्रों और धर्मगुरुओं से मिलकर मानवता के कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। संत संसद में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज का यह संबोधन विश्व शांति और मानव एकता का संदेश लेकर सामने आया।
