दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों पर नई परिभाषा, MCD ने कचरे को 3 श्रेणियों में बांटा

दिल्ली

नई दिल्ली। दिल्ली के तीनों लैंडफिल साइटों पर जमा कचरे को लेकर MCD ने नई वर्गीकरण व्यवस्था लागू की है। अब लैंडफिल के कचरे को लिगेसी वेस्ट, सेमी-लिगेसी वेस्ट और फ्रेश वेस्ट की तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

31 मार्च 2025 तक का कचरा ‘लिगेसी वेस्ट’

MCD के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक लैंडफिल पर डाला गया कचरा ‘लिगेसी वेस्ट’ माना जाएगा।
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक का कचरा ‘सेमी-लिगेसी वेस्ट’ और 1 अप्रैल 2026 के बाद डाला जा रहा कचरा ‘फ्रेश वेस्ट’ कहलाएगा।

निगम का कहना है कि इससे अलग-अलग अवधि में जमा हुए कचरे के आकलन और निस्तारण की निगरानी आसान होगी। हालांकि, कचरे की श्रेणी बदलने से लैंडफिल पर मौजूद कुल कचरे की मात्रा कम नहीं होगी।

43 एकड़ में बनेंगे 5 नए प्लांट

नए कचरे के निस्तारण के लिए दिल्ली में करीब 43 एकड़ जमीन पर पांच नए कचरा निस्तारण संयंत्र विकसित किए जा रहे हैं। इनकी कुल प्रस्तावित क्षमता करीब 5,900 टन प्रतिदिन बताई गई है।

भलस्वा में करीब 12 एकड़ में प्रस्तावित प्लांट की क्षमता 1,800 टन प्रतिदिन और सिंघोला में 6.6 एकड़ के प्लांट की क्षमता 700 टन प्रतिदिन बताई गई है।

तीनों लैंडफिल पर अब भी लाखों टन कचरा

MCD के आंकड़ों के मुताबिक—

  • ओखला: करीब 15 लाख टन
  • भलस्वा: करीब 19.4 लाख टन
  • गाजीपुर: करीब 68.5 लाख टन

गाजीपुर की स्थिति सबसे गंभीर बताई गई है, जहां करीब 66.8 लाख टन कचरा लिगेसी और सेमी-लिगेसी श्रेणी में है।

असली चुनौती क्या?

कूड़े के पहाड़ खत्म करने के लिए सिर्फ पुराने कचरे की बायोमाइनिंग पर्याप्त नहीं होगी। MCD के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं—पुराने कचरे का तेजी से निस्तारण और नए कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकना।

ACTION BHARAT | DELHI NEWS
हेडलाइन: “कूड़े के पहाड़ों की बदली परिभाषा! MCD ने लिगेसी, सेमी-लिगेसी और फ्रेश वेस्ट में बांटा कचरा”

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