नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने वर्ष 2020 के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव नीलमणि चौहान के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने उन्हें ₹2.92 करोड़ से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
फैसले की सबसे अहम बात यह रही कि बीमा कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया गया, जिसमें कहा गया था कि हादसे के समय नीलमणि ने हेलमेट नहीं पहना था, इसलिए उन्हें भी हादसे के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि सिर्फ यातायात नियम का उल्लंघन अपने आप में सहभागी लापरवाही (contributory negligence) साबित नहीं करता। यह साबित करना जरूरी है कि नियम का उल्लंघन वास्तव में हादसे का कारण बना या चोट की गंभीरता बढ़ाने में उसकी भूमिका रही।
30 दिसंबर 2020 को हुआ था हादसा
मामले के अनुसार, 30 दिसंबर 2020 को नीलमणि चौहान दोपहिया वाहन से जा रहे थे। इसी दौरान एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि कार चालक रमेश तेज और लापरवाही से वाहन चला रहा था। टक्कर के बाद नीलमणि को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी।
चोट इतनी गंभीर थी कि उनके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। मेडिकल रिकॉर्ड में उन्हें पैराप्लेजिया और न्यूरोजेनिक ब्लैडर जैसी गंभीर समस्याओं के साथ रीढ़ की हड्डी की चोट दर्ज की गई।
ट्रिब्यूनल के मुताबिक उनकी स्थायी दिव्यांगता 88 प्रतिशत है।
नीलमणि अब न खड़े हो सकते हैं, न चल सकते हैं
MACT ने मामले में नीलमणि की चोट और भविष्य की जिंदगी पर उसके प्रभाव को भी महत्वपूर्ण माना।
फैसले के मुताबिक वह अब जीवनभर न तो खड़े हो सकते हैं और न ही चल सकते हैं।
नीलमणि का पेशा मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव का था। इस काम में काफी भागदौड़ होती है। ट्रिब्यूनल ने माना कि उनकी मौजूदा शारीरिक स्थिति के कारण वह भविष्य में इस तरह का काम नहीं कर पाएंगे।
यहां तक कि अगर उन्हें डेस्क जॉब दिया जाए, तब भी उनकी स्थिति को देखते हुए पूर्णकालिक अटेंडेंट की आवश्यकता होगी।
नियोक्ता ने मानवीय आधार पर वेतन जारी रखा
मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि नीलमणि के नियोक्ता ने मानवीय आधार पर ट्रिब्यूनल के फैसले तक उन्हें वेतन देना जारी रखा था।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने भविष्य में उनकी कमाई की क्षमता पर गंभीर असर को देखते हुए भविष्य की आय के नुकसान को भी मुआवजे की गणना में शामिल किया।
इसके अलावा इलाज, देखभाल और अटेंडेंट सहित विभिन्न मदों को ध्यान में रखकर कुल मुआवजा निर्धारित किया गया।
हेलमेट नहीं पहनने पर MACT की अहम टिप्पणी
मामले में बीमा कंपनी IFFCO Tokio General Insurance ने दलील दी कि नीलमणि ने हादसे के समय हेलमेट नहीं पहना था। इसलिए उनकी भी लापरवाही थी और मुआवजा कम किया जाना चाहिए।
लेकिन पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि मोटर वाहन कानून के तहत हेलमेट नहीं पहनना यातायात नियम का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर पीड़ित को हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
जरूरी है कि यह स्थापित किया जाए कि हेलमेट नहीं पहनने और हादसे के बीच सीधा संबंध था।
आसान भाषा में समझें
अगर किसी वाहन चालक की लापरवाही से दुर्घटना हुई है, तो केवल यह तथ्य कि घायल व्यक्ति ने हेलमेट नहीं पहना था, अपने आप यह साबित नहीं करता कि दुर्घटना उसकी गलती से हुई।
यानी अदालत को यह देखना होगा कि हेलमेट न पहनने का हादसे के होने या चोट की गंभीरता से वास्तविक संबंध था या नहीं।
बीमा कंपनी ने हादसे को बताया था फर्जी
मुआवजे के मामले में बीमा कंपनी ने एक और गंभीर दलील दी थी। कंपनी ने हादसे को फर्जी बताते हुए दावा खारिज करने की कोशिश की।
लेकिन MACT ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर बीमा कंपनी को हादसा फर्जी होने का संदेह था, तो जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वह संबंधित DCP के समक्ष शिकायत कर सकती थी।
लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर भरोसा
ट्रिब्यूनल ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद कहा कि ऐसा कोई पर्याप्त आधार सामने नहीं आया जिससे जांच अधिकारी की जांच और उसके निष्कर्षों पर अविश्वास किया जा सके।
इसलिए बीमा कंपनी की ओर से हादसे को फर्जी बताकर दावा खारिज करने की कोशिश को भी ट्रिब्यूनल ने स्वीकार नहीं किया।
₹2.92 करोड़ से ज्यादा मुआवजा क्यों?
नीलमणि की चोट सामान्य चोट नहीं थी। उन्हें 88 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का सामना करना पड़ा और इसका सीधा प्रभाव उनके पूरे भविष्य पर पड़ा।
मुआवजे का निर्धारण करते समय ट्रिब्यूनल ने विभिन्न पहलुओं पर विचार किया, जिनमें प्रमुख रूप से:
- भविष्य की आय का नुकसान
- इलाज और चिकित्सा खर्च
- अटेंडेंट की जरूरत
- गंभीर और स्थायी शारीरिक अक्षमता
- भविष्य में रोजगार की क्षमता पर प्रभाव
- दुर्घटना के बाद जीवनभर की निर्भरता
इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीलमणि को ₹2.92 करोड़ से अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
इस फैसले का महत्व क्या है?
दिल्ली MACT का यह फैसला सड़क दुर्घटना मुआवजे के मामलों में एक महत्वपूर्ण बात को रेखांकित करता है—यातायात नियम का उल्लंघन और दुर्घटना के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार होना, दोनों हमेशा एक ही बात नहीं हैं।
किसी पीड़ित ने हेलमेट नहीं पहना था, यह तथ्य अपने आप मुआवजा घटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। बीमा कंपनी या प्रतिवादी को यह स्थापित करना होगा कि उस लापरवाही का दुर्घटना या चोट से वास्तविक संबंध था।
साथ ही, इस मामले में ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की भविष्य की कमाई, स्थायी दिव्यांगता और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल की जरूरत को मुआवजे के आकलन में महत्वपूर्ण माना।
ACTION BHARAT की बड़ी खबर
“हेलमेट नहीं पहना तो भी मुआवजा नहीं कटेगा? दिल्ली MACT का बड़ा फैसला—88% दिव्यांग मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव को ₹2.92 करोड़ से ज्यादा मुआवजा”
