स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों कमजोर हो रही ईरान की पकड़? वैकल्पिक रूट और अमेरिकी दबाव ने बदला खेल

विदेश

नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के प्रभाव को लेकर तस्वीर तेजी से बदल रही है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि ईरान ने पूरी तरह इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण खो दिया है, लेकिन अमेरिकी नौसैनिक दबाव, बेहद कम समुद्री यातायात और ओमान की दिशा से वैकल्पिक मार्गों के इस्तेमाल ने तेहरान की स्थिति को चुनौती जरूर दी है।

होर्मुज में आखिर बदल क्या रहा है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से गुजरता है। लेकिन मौजूदा ईरान-अमेरिका टकराव के बीच यहां जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। रॉयटर्स के अनुसार 18 अगस्त को सिर्फ छह कमोडिटी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि हाल का औसत करीब 11 प्रतिदिन था।

यानी फिलहाल कहानी सिर्फ यह नहीं है कि कौन होर्मुज को नियंत्रित कर रहा है, बल्कि यह भी है कि कितने जहाज जोखिम उठाकर यहां से गुजरने को तैयार हैं।

अमेरिका का नौसैनिक दबाव

अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पिछले सप्ताह कहा था कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की ओर से होर्मुज की स्थिति को लेकर परस्पर विरोधी दावे सामने आ रहे हैं। ट्रंप इसे खुला बताते हैं, जबकि तेहरान अब भी जलमार्ग को बंद बताता है।

ओमान की तरफ बढ़ रहा समुद्री ट्रैफिक

ईरान के दबाव के बीच कुछ जहाज ओमान की ओर के समुद्री मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका रणनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि इससे जहाज ईरान के सीधे प्रभाव वाले हिस्से से बचने की कोशिश करते हैं।

हालिया रिपोर्टों में इसे ईरान के प्रभाव के कमजोर पड़ने के संकेत के रूप में देखा गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास जलमार्ग को बाधित करने की क्षमता खत्म हो गई है।

‘डार्क शिपिंग’ ने बढ़ाई मुश्किल

एक और महत्वपूर्ण बदलाव डार्क शिपिंग है। कुछ जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद करके या अपनी लोकेशन को सार्वजनिक रूप से प्रसारित किए बिना आवाजाही कर रहे हैं।

इससे समुद्री यातायात की निगरानी मुश्किल होती है और यह भी पता लगाना कठिन हो जाता है कि वास्तविक रूप से कितने जहाज किस रास्ते से तेल लेकर जा रहे हैं। रॉयटर्स ने भी हाल के दिनों में ट्रांसपोंडर बंद करके संचालित होने वाले जहाजों का उल्लेख किया है।

लेकिन क्या ईरान सचमुच होर्मुज हार गया?

अभी नहीं।

यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। जहाजों का वैकल्पिक मार्ग अपनाना ईरान की राजनीतिक और आर्थिक पकड़ को कमजोर कर सकता है, लेकिन दूसरी ओर समुद्री यातायात का बेहद कम होना भी दिखाता है कि ईरान अभी भी जहाजों के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।

18-19 अगस्त की रिपोर्टों में भी होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम रही। कई बड़े जहाज अब भी जोखिम के कारण इस मार्ग से बच रहे हैं।

असली लड़ाई टोल टैक्स की नहीं, नियंत्रण की है

ईरान पहले होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर अपना प्रभाव और संभावित शुल्क वसूलने का अधिकार स्थापित करना चाहता था। जुलाई में रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नियंत्रण और जहाजों से शुल्क लेने की क्षमता की मान्यता चाहता था।

लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपना लेती हैं, तो ईरान के लिए जहाजों की आवाजाही पर प्रभाव डालना और उससे आर्थिक लाभ हासिल करना दोनों कठिन हो सकते हैं।

भारत और दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

होर्मुज में लंबा गतिरोध सिर्फ ईरान और अमेरिका का मामला नहीं है। इसका सीधा असर कच्चे तेल, एलएनजी, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।

19 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था और बाजार में होर्मुज को लेकर जोखिम प्रीमियम बना हुआ था।

भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है।

ACTION BHARAT के 5 बड़े सवाल

  1. क्या ईरान वास्तव में होर्मुज पर अपना प्रभाव खो रहा है?
  2. क्या ओमान रूट भविष्य में स्थायी वैकल्पिक समुद्री मार्ग बन सकता है?
  3. अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा कब तक जहाजों को भरोसा दे पाएगी?
  4. होर्मुज संकट का असर कच्चे तेल की कीमतों पर कितना पड़ेगा?
  5. अगर संकट लंबा चला तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर होगा?

ACTION BHARAT | भू-राजनीति की खबर, सिर्फ खबर नहीं—उसका असर भी।

#StraitOfHormuz #Iran #USA #DonaldTrump #Oman #MiddleEast #OilPrice #CrudeOil #EnergyCrisis #Geopolitics #Shipping #IranUSConflict #ActionBharat

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *