नई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में तिहाड़ जेल में निधन हो गया। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में वह आरोपी या दोषी ठहराए गए थे। उनके निधन के बाद उनके खिलाफ लंबित व्यक्तिगत आपराधिक कार्यवाही अब कानून के अनुसार समाप्त हो जाएगी।
किन मामलों में क्या स्थिति थी?
- दिल्ली कैंट-राजनगर मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उनकी सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित थी।
- सरस्वती विहार मामला: 2025 में उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह उनकी दूसरी उम्रकैद थी।
- जनकपुरी मामला: जनवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया था। इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील लंबित थी।
- विकासपुरी मामला: 2023 में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।
- सुल्तानपुरी मामला: सितंबर 2023 में अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
निधन के बाद अपील का क्या होगा?
किसी आरोपी की मृत्यु होने पर उसके खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक मुकदमा सामान्यतः आगे नहीं चल सकता। दोषसिद्धि के खिलाफ लंबित अपील भी सामान्य नियम के तहत समाप्त हो जाती है।
हालांकि, कानून में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। मृतक के पति/पत्नी, संतान, माता-पिता, भाई या बहन अदालत की अनुमति लेकर कुछ परिस्थितियों में लंबित अपील को आगे जारी रख सकते हैं। इसके लिए निर्धारित समय में अदालत में आवेदन करना होता है।
इसका मतलब क्या है?
सज्जन कुमार के निधन के बाद अदालतें उनके खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी तय करने वाली लंबित कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाएंगी। लेकिन जिन मामलों में अन्य आरोपी शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्यवाही अपने-आप खत्म नहीं होती और वे मुकदमे कानून के अनुसार जारी रह सकते हैं।
नोट: यह खबर आपके दिए गए स्रोत/विवरण के आधार पर तैयार की गई है। 1984 दंगा मामलों की कानूनी स्थिति में छोटे-छोटे बदलाव भी संबंधित अदालत के नवीनतम आदेश पर निर्भर कर सकते हैं।
