नई दिल्ली (Action Bharat)। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधना भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधते समय तीन गांठें लगाने की परंपरा क्यों है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी की तीन गांठों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता में इन गांठों को भाई के स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना से जोड़ा जाता है।
तीन गांठों का क्या है महत्व?
पहली गांठ—ब्रह्मा:
भाई की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी मानी जाती है।
दूसरी गांठ—विष्णु:
भाई के जीवन में सुख, समृद्धि और सुरक्षा की कामना का प्रतीक मानी जाती है।
तीसरी गांठ—महेश:
मानसिक शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना से जोड़ी जाती है।
कुछ ज्योतिषीय व्याख्याओं में इन तीन गांठों को धर्म, अर्थ और काम जैसे जीवन के पुरुषार्थों के संतुलन से भी जोड़ा जाता है।
राखी बांधते समय किन बातों का ध्यान रखें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी शुभ मुहूर्त में बांधना चाहिए और भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की परंपरा है। कई परिवारों में राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने की परंपरा भी मानी जाती है।
हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में राखी बांधने की विधि और तीन गांठों की व्याख्या अलग हो सकती है।
Action Bharat का सवाल:
आपके घर में राखी बांधते समय कितनी गांठें लगाने की परंपरा है—3 या कोई अलग रीति?
