लखनऊ। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी UP RERA के आदेश के अनुपालन में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट में तय रकम से करीब 2.87 लाख रुपये कम का चेक जारी करने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाई है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ अशोक कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले में कोर्ट ने आवास आयुक्त को मंगलवार सुबह 10:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर कम राशि का चेक जारी करने का कारण बताने का निर्देश दिया है।
🎯 क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, UP RERA ने 29 जुलाई 2025 को अशोक कुमार सिंह के पक्ष में आदेश पारित किया था।
इसके बाद आदेश के अनुपालन में 27 मई 2026 को 26,58,806.01 रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया। लेकिन निर्धारित राशि की वसूली के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर याची ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में हाई कोर्ट ने 7 अगस्त को आवास एवं विकास परिषद को देय राशि 10 दिनों के भीतर जमा करने का आदेश दिया था।
🎯 कोर्ट के सामने आया कम रकम का चेक
सोमवार को परिषद ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, लखनऊ खंडपीठ के नाम 23,71,126 रुपये का चेक तैयार किया गया है।
यहीं पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाया।
रिकवरी सर्टिफिकेट में जहां 26.58 लाख रुपये से अधिक की राशि निर्धारित थी, वहीं परिषद की ओर से करीब 23.71 लाख रुपये का ही चेक क्यों जारी किया गया?
कोर्ट ने इस अंतर को लेकर परिषद से स्पष्टीकरण मांगा।
🎯 विभागीय गणना का जवाब नहीं माना कोर्ट ने
परिषद की ओर से कम राशि के लिए विभागीय गणना का हवाला दिया गया, लेकिन कोर्ट के सामने यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि वैधानिक प्राधिकरण यानी UP RERA द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट के विपरीत अलग गणना किस आधार पर की गई।
कोर्ट ने यह भी पाया कि परिषद के हलफनामे के साथ गणना का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत नहीं किया गया था।
इस पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी UP RERA और हाई कोर्ट की कार्यवाही को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
🎯 आवास आयुक्त को देना होगा जवाब
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आवास आयुक्त मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने उपस्थित हों और बताएं कि रिकवरी सर्टिफिकेट में निर्धारित राशि से कम रकम का चेक आखिर किस आधार पर तैयार किया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि याची के आवेदन पर नियमों के अनुसार सही राशि का चेक जारी किया जाए।
मामला अब सिर्फ बकाया रकम की वसूली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी सामने आ गया है कि जब किसी वैधानिक प्राधिकरण ने रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया है, तो संबंधित विभाग उसके विपरीत अपनी अलग गणना कैसे कर सकता है।
अगली सुनवाई में आवास आयुक्त के जवाब के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।
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