336 फ्लैट खाली कराने के बाद भी अटका सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स का ध्वस्तीकरण, CBI जांच के चलते 4-5 महीने और लगने की संभावना

दिल्ली

नई दिल्ली। दिल्ली के सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स के ध्वस्तीकरण का इंतजार कर रहे लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। अपार्टमेंट्स के सभी 336 फ्लैट खाली कराए जाने के बावजूद डीडीए की ध्वस्तीकरण कार्रवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है। निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री से जुड़े मामलों की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नमूने जुटाए जाने की प्रक्रिया इसके पीछे प्रमुख वजह बताई जा रही है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों के मुताबिक, CBI की जांच के लिए आवश्यक अधिकांश नमूने जुटाए जा चुके हैं और उन्हें जांच के लिए दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) भेजा जा रहा है। हालांकि, इमारत में किए गए सुदृढ़ीकरण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए अभी कुछ और नमूने लिए जाने हैं।

इन प्रक्रियाओं के पूरा होने और आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही ध्वस्तीकरण तथा मलबा हटाने का काम शुरू किया जा सकेगा। डीडीए के अनुमान के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने का समय लग सकता है।

336 फ्लैट खाली, लेकिन इमारत अब भी खड़ी

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स में कुल 12 ब्लॉक और 336 फ्लैट हैं। इमारत की संरचनात्मक स्थिति को लेकर सवाल उठने के बाद यहां रहने वाले लोगों को अपने फ्लैट खाली करने पड़े।

बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाने के बाद अधिकांश निवासियों ने अक्टूबर 2025 में दिवाली से पहले ही फ्लैट खाली कर दिए थे। इसके बाद से बड़ी संख्या में लोग वैकल्पिक आवास में रहने को मजबूर हैं।

लोगों को उम्मीद थी कि फ्लैट खाली होने के बाद जल्द ही इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू होगी, लेकिन CBI जांच और नमूने जुटाने की प्रक्रिया के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

CBI जांच के लिए डीडीए करेगा अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती

डीडीए अब नमूने जुटाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती करने की तैयारी में है।

इसके तहत सभी 12 ब्लॉकों की मंजिलों पर बिजली और रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। डीडीए की निविदा के अनुसार, इमारत की ऊपरी मंजिलों तक बिजली पहुंचाई जाएगी ताकि जिन स्थानों से निर्माण सामग्री के नमूने लिए जाने हैं, वहां पर्याप्त रोशनी उपलब्ध हो।

अधिकारियों का मानना है कि नमूने जुटाने का काम व्यवस्थित तरीके से पूरा होने के बाद उन्हें जांच के लिए DTU भेजा जाएगा। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और सुदृढ़ीकरण से जुड़े पहलुओं की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।

ध्वस्तीकरण के लिए निविदा भी जारी हो चुकी है

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स को गिराने के लिए डीडीए की ओर से ध्वस्तीकरण की निविदा जारी की जा चुकी है। हालांकि, CBI की ओर से जांच से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक एनओसी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

यही वजह है कि निविदा जारी होने के बावजूद मौके पर ध्वस्तीकरण का काम शुरू नहीं किया जा सका है।

अधिकारियों के अनुसार, जांच के लिए आवश्यक सभी नमूने और साक्ष्य जुटाए जाने के बाद ही ध्वस्तीकरण की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

कब चलेगा इमारत पर डीडीए का हथौड़ा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 336 फ्लैट खाली होने के बाद भी इमारत को कब गिराया जाएगा?

डीडीए अधिकारियों के अनुसार, CBI की जांच से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने, अतिरिक्त नमूने जुटाने, उनकी जांच और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ध्वस्तीकरण शुरू किया जा सकेगा।

पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने लगने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक समय जांच और मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी होने की गति पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब है कि खाली पड़ी इमारत को हटाने के लिए प्रभावित परिवारों को अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है।

फ्लैट खाली करने वाले लोगों की बढ़ी परेशानी

अपार्टमेंट्स खाली करने के बाद यहां रहने वाले परिवारों की परेशानियां भी कम नहीं हुई हैं। कई निवासियों को लंबे समय से वैकल्पिक आवास में रहना पड़ रहा है।

डीडीए की ओर से प्रभावित लोगों को किराया दिया जा रहा है, लेकिन निवासियों का कहना है कि मूल किराये में केवल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। मौजूदा परिस्थितियों में यह बढ़ोतरी उनके लिए पर्याप्त नहीं है।

वैकल्पिक आवास की वजह से कई लोगों को अपने कार्यस्थल, स्कूल और कॉलेज से काफी दूर रहना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

लोगों के सामने अब दोहरी चुनौती

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स के निवासियों के लिए स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि एक तरफ उन्हें अपने पुराने फ्लैट खाली करने पड़े हैं और दूसरी तरफ नए आवास में रहने का खर्च तथा रोजाना आने-जाने की परेशानी बनी हुई है।

वहीं, इमारत के ध्वस्तीकरण में देरी के कारण यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें अपने स्थायी पुनर्वास या आगे की व्यवस्था के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा।

फिलहाल डीडीए की प्राथमिकता CBI जांच के लिए आवश्यक नमूने और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पूरी करना है। इसके बाद DTU में निर्माण सामग्री की जांच और संबंधित अनुमोदनों के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

336 फ्लैट खाली होने के करीब एक साल बाद भी सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स का मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच और नमूना प्रक्रिया कब पूरी होती है और डीडीए कब इस बहुमंजिला परिसर को गिराने की वास्तविक कार्रवाई शुरू करता है।

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