नई दिल्ली। जन्माष्टमी के पर्व में अब महज एक दिन शेष है और राजधानी दिल्ली में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों से लेकर घरों और बाजारों तक हर तरफ कान्हा के स्वागत की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों की तैयारी चल रही है, वहीं सदर बाजार और चांदनी चौक के किनारी बाजार में लड्डू गोपाल की पोशाक, मुकुट, झूले और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ रही है।
शुक्रवार की मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही राजधानी के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। कई इलाकों में शोभायात्राओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी कृष्ण जन्मोत्सव का संदेश दिया जा रहा है।
लड्डू गोपाल की पोशाक और मुकुट की बढ़ी मांग
जन्माष्टमी से पहले दिल्ली के प्रमुख बाजारों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल के लिए विशेष पोशाकों की मांग बढ़ गई है। दुकानों पर मोती, सितारे और मोर पंख से सजी हाथ से तैयार की गई पोशाकें लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
इसके अलावा मुकुट, कुंडल, माला, बांसुरी और मोर पंख की भी खूब बिक्री हो रही है। दुकानदारों के पास छोटे से लेकर बड़े आकार तक के विभिन्न डिजाइन वाले झूले मौजूद हैं। कुछ झूलों में सजावट के साथ बाल गोपाल की प्रतिमा पहले से ही विराजमान की गई है, जिन्हें श्रद्धालु सीधे अपने घर ले जाकर पूजा स्थल पर स्थापित कर सकते हैं।
स्कूलों के कार्यक्रमों से भी बढ़ी खरीदारी
जन्माष्टमी की तैयारियों का असर केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। दिल्ली के स्कूलों में भी जन्माष्टमी के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके चलते बच्चों के लिए भगवान कृष्ण और राधा के परिधानों की मांग भी बढ़ गई है।
अभिभावक बच्चों को बाल गोपाल, माखन चोर और राधा-कृष्ण के रूप में तैयार करने के लिए पोशाक खरीद रहे हैं। कई दुकानों पर पोशाक के साथ मुकुट, बांसुरी और आभूषण का पूरा सेट उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अभिभावकों को अलग-अलग सामान खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही।
महंगाई के बावजूद भक्तों के उत्साह में कमी नहीं
कारोबारियों का कहना है कि इस वर्ष कपड़े और सजावटी सामान की लागत बढ़ने के कारण कई उत्पादों के दाम में भी वृद्धि हुई है। इसके बावजूद जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं के उत्साह में कमी नहीं दिखाई दे रही है।
दुकानदारों के अनुसार, जन्माष्टमी से करीब एक से डेढ़ महीने पहले ही कान्हा की पोशाक और सजावटी सामान तैयार करने का काम शुरू हो जाता है। अब पर्व नजदीक आने के साथ बिक्री में तेजी आई है और जन्माष्टमी से पहले के दो दिन बाजार के लिए सबसे अधिक कारोबार वाले साबित हो सकते हैं।
किनारी बाजार के दुकानदार श्याम अग्रवाल के मुताबिक इस बार हाथ से तैयार मोती, सितारे और मोर पंख वाली पोशाकों की विशेष मांग है। वहीं गोटा जरी व्यापार मंडल किनारी बाजार के संरक्षक आलोक गुप्ता ने बताया कि ग्राहक सामान्य पोशाकों के बजाय डिजाइनर पोशाकों और अलग-अलग तरह के झूलों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन (फेस्टा) के महामंत्री राजेंद्र शर्मा के अनुसार, स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों के कारण बच्चों के लिए राधा-कृष्ण और बाल गोपाल की पोशाकों की मांग लगातार बढ़ रही है। जन्माष्टमी तक बाजार में बिक्री और तेज होने की उम्मीद है।
बिरला मंदिर में भजन से लेकर नृत्य नाटिका तक
मंदिर मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर यानी बिरला मंदिर में भी जन्माष्टमी के लिए विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। यहां वृंदावन से आए रासलीला कलाकारों के साथ दक्षिण भारत और अन्य राज्यों से आए कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह करीब आठ बजे विभिन्न अनुष्ठानों के साथ होगी। इसके बाद भक्तिमय भजन, दशावतार की प्रस्तुति और नृत्य नाटिका का आयोजन किया जाएगा। शाम सात बजे तक श्याम रंग नृत्य नाटिका, इसके बाद रात साढ़े सात बजे से रात 10 बजे तक कृष्ण लीला का मंचन प्रस्तावित है।
रात में कृष्ण वंदे कार्यक्रम के बाद मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर महाआरती और भोग लगाया जाएगा।
घर-घर में कान्हा के स्वागत की तैयारी
दिल्ली में जन्माष्टमी को लेकर धार्मिक उत्साह का असर अब घरों में भी साफ दिखाई दे रहा है। लोग अपने पूजा स्थलों को सजाने के लिए फूल, झूले, मोर पंख, रंग-बिरंगी लाइटें और अन्य सजावटी सामान खरीद रहे हैं। कई परिवारों ने लड्डू गोपाल के लिए नए वस्त्र और आभूषण भी खरीदे हैं।
जन्माष्टमी से पहले राजधानी के बाजारों में धार्मिक आस्था के साथ खरीदारी का उत्साह भी चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार की मध्यरात्रि जैसे ही श्रीकृष्ण के जन्म का समय होगा, मंदिरों और घरों में “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय होने की उम्मीद है।
