नई दिल्ली | पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े बड़े बैंकिंग घोटाले में वांछित भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत वापस लाने की कोशिशों में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार ने बेल्जियम के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत में चोकसी के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया है। बातचीत के दौरान बेल्जियम की ओर से इस मामले में सकारात्मक रुख सामने आने की जानकारी मिली है।
हालांकि, सकारात्मक संकेत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मेहुल चोकसी का तत्काल भारत प्रत्यर्पण हो जाएगा। बेल्जियम में प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी और संबंधित अधिकारियों तथा अदालतों के स्तर पर मामले की जांच होगी।
भारत ने प्रत्यर्पण को बताया प्राथमिकता
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने बेल्जियम के साथ बातचीत में स्पष्ट किया कि मेहुल चोकसी को भारत वापस लाना और उसके खिलाफ लंबित मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।
चोकसी लंबे समय से भारत से बाहर है और उसके खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई चल रही है। भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण के लिए राजनयिक और कानूनी दोनों माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है।
मामला कई देशों से जुड़ा होने के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जटिल रही है। चोकसी की नागरिकता, निवास और अलग-अलग देशों में उसके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही भी इस मामले को पेचीदा बनाती रही है।
बेल्जियम से क्यों महत्वपूर्ण है यह संकेत?
मेहुल चोकसी वर्तमान समय में बेल्जियम से जुड़े कानूनी घटनाक्रम के कारण भारत के प्रत्यर्पण प्रयासों के केंद्र में है।
बेल्जियम के अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में एंटवर्प में चोकसी को गिरफ्तार किया था। उस समय वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ वहां रह रहा था।
इसके बाद चोकसी को भारत वापस लाने की संभावनाओं को लेकर कानूनी प्रक्रिया और कूटनीतिक प्रयास तेज हुए। अब भारत-बेल्जियम वार्ता में सकारात्मक संकेत मिलने से भारतीय एजेंसियों के प्रत्यर्पण प्रयासों को आगे बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।
क्या है मेहुल चोकसी का मामला?
मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में जांच चल रही है। मामला वर्ष 2018 में सामने आया था और इसके सामने आने से पहले ही चोकसी भारत से बाहर जा चुका था।
उस पर बैंकिंग व्यवस्था में धोखाधड़ी के जरिए बड़ी रकम हासिल करने और उसे देश से बाहर ले जाने से जुड़े गंभीर आरोप हैं। भारतीय जांच एजेंसियां इस मामले में उसकी भूमिका की जांच कर रही हैं।
चोकसी भारत से जाने के बाद एंटीगुआ और बारबुडा पहुंचा और वहां की नागरिकता हासिल कर ली। इसके बाद उसकी गतिविधियां और अलग-अलग देशों में उसका रहना भारत की जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा।
2021 में डोमिनिका पहुंचने से बढ़ा था विवाद
वर्ष 2021 में मेहुल चोकसी के एंटीगुआ और बारबुडा से अचानक गायब होने और बाद में डोमिनिका में पाए जाने के बाद मामला और पेचीदा हो गया था।
उस समय उसके संभावित निर्वासन और भारत वापसी को लेकर कानूनी एवं कूटनीतिक विवाद सामने आया था। चोकसी की नागरिकता और उसे किस देश को सौंपा जाना चाहिए, इस सवाल को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर कानूनी प्रक्रियाएं चलीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत के लिए उसे वापस लाने की प्रक्रिया को और लंबा बना दिया।
नीरव मोदी भी भारत की जांच के घेरे में
PNB मामले में मेहुल चोकसी के अलावा उसका भतीजा नीरव मोदी भी प्रमुख आरोपी है। नीरव मोदी भी भारत से बाहर है और भारतीय सरकार उसे भी देश वापस लाने की कोशिश कर रही है।
इस मामले में भारत की जांच एजेंसियों का उद्देश्य आरोपों से जुड़े लोगों को भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के सामने लाना और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी संपत्तियों तथा धन की वसूली की दिशा में कार्रवाई करना है।
प्रत्यर्पण अभी कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर
बेल्जियम की ओर से सकारात्मक रुख सामने आना भारत के लिए निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है, लेकिन इसे तत्काल प्रत्यर्पण की मंजूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण से पहले संबंधित देश की कानूनी व्यवस्था के तहत कई चरणों से गुजरना पड़ सकता है। अदालतों में आपत्तियां, अपील और अन्य कानूनी विकल्प भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए अब निगाहें बेल्जियम में होने वाली आगे की कानूनी कार्यवाही और भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों पर रहेंगी।
भारत के लिए क्यों अहम है चोकसी की वापसी?
मेहुल चोकसी की भारत वापसी केवल एक आरोपी को देश लाने का मामला नहीं है। PNB घोटाले ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था, निगरानी तंत्र और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम को लेकर भी बड़े सवाल खड़े किए थे।
यदि चोकसी को भारत लाया जाता है तो भारतीय जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने मामले की आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसके साथ ही कथित आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जाएगा।
अब आगे क्या?
भारत और बेल्जियम के बीच बातचीत के बाद प्रत्यर्पण को लेकर उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। भारतीय एजेंसियां चोकसी की वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और कूटनीतिक प्रयास जारी रखेंगी।
News for Action Bharat का सवाल:
मेहुल चोकसी की भारत वापसी की कोशिशें वर्षों से चल रही हैं। अब जब बेल्जियम की ओर से सकारात्मक संकेत सामने आए हैं, क्या यह लंबी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को निर्णायक मोड़ तक पहुंचा पाएगा?
