नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा विकास दर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष और सरकार की आर्थिक नीतियों के आलोचकों पर तीखा हमला बोला है। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर का उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग कभी भारत को दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में रखते थे, वे आज देश की तेज आर्थिक वृद्धि पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देश में हो रहे सकारात्मक बदलावों को स्वीकार करने के बजाय कुछ लोग लगातार उनमें कमियां तलाशते हैं। उन्होंने ऐसे आलोचकों को निराशावादी बताते हुए कहा कि भारत की प्रगति को लेकर नकारात्मक अभियान चलाने वालों के बावजूद देश आगे बढ़ रहा है।
7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ को लेकर विपक्ष पर निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया 7.8 प्रतिशत की तिमाही GDP वृद्धि दर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पहले भारत की अर्थव्यवस्था को ‘Fragile Five’ यानी कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिना था, वही लोग अब भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को स्वीकार करने के बजाय उसके आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत ने पिछले वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और इनका असर देश की आर्थिक क्षमता में दिखाई दे रहा है।
आलोचकों को बताया ‘जन्मजात निराशावादी’
प्रधानमंत्री ने सरकार की आर्थिक नीतियों और देश की प्रगति पर लगातार सवाल उठाने वाले आलोचकों पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों की सोच ऐसी है कि उन्हें देश में होने वाली हर अच्छी चीज में भी कोई न कोई कमी नजर आती है।
उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की तुलना परिवार के ऐसे ‘नाराज फूफा’ और ‘चिरस्थायी चाचा’ से की, जो किसी भी सकारात्मक घटनाक्रम से संतुष्ट नहीं होते।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए गिलास कभी आधा भरा हुआ दिखाई नहीं देता। उनके मुताबिक, सरकार की कई योजनाओं और पहलों का भी इसी मानसिकता के साथ विरोध किया गया।
जनधन से मेक इन इंडिया तक का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जन धन योजना और मेक इन इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सरकार ने इन योजनाओं को शुरू किया था, तब भी आलोचकों ने इन पर सवाल उठाए थे।
मोदी ने दावा किया कि समय के साथ इन पहलों का प्रभाव सामने आया और भारत की आर्थिक तथा औद्योगिक क्षमता में बदलाव देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया में जिस तरह की चर्चा हो रही है, वह देश की बदलती आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक वृद्धि को वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में भी रखा। उन्होंने यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों तथा व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे माहौल में भी भारत ने मजबूत विकास दर दर्ज की है।
उनके मुताबिक, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती यह दिखाती है कि देश ने अपनी आर्थिक बुनियाद को मजबूत किया है।
हालांकि, आर्थिक विकास के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और विपक्ष की ओर से सरकार के आर्थिक दावों तथा आंकड़ों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
‘झूठ के अभियान’ पर भी प्रधानमंत्री का हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आलोचकों के कथित नकारात्मक अभियान पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति से असहज होने वाले लोग ‘झूठ का अभियान’ चलाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन अंततः सत्य की ताकत ही प्रभावी होती है।
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत की वास्तविक उपलब्धियां और देश की जनता का अनुभव इस तरह के नकारात्मक प्रचार का जवाब देंगे।
‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर भी बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री के संबोधन में उनकी हालिया ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को लेकर चल रहे विवाद का भी संदर्भ आया।
उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक तरह की ‘होम्योपैथिक गोली’ दी थी और उसके बाद ‘दिमागी नक्सल’ बाहर आ गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता अब ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देने वालों का वास्तविक चेहरा पहचान चुकी है।
यह टिप्पणी राजनीतिक विवाद का विषय बनी हुई है और विपक्षी दल प्रधानमंत्री के इस बयान की आलोचना कर चुके हैं।
आर्थिक आंकड़ों पर जारी है राजनीतिक बहस
भारत की GDP वृद्धि दर को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस कोई नई बात नहीं है। सरकार मजबूत विकास दर को अपनी आर्थिक नीतियों की सफलता के प्रमाण के तौर पर पेश करती है, जबकि विपक्ष GDP के आंकड़ों के साथ रोजगार, महंगाई, आय और आम लोगों की आर्थिक स्थिति जैसे अन्य संकेतकों को भी देखने की मांग करता रहा है।
ऐसे में प्रधानमंत्री का SRCC में दिया गया भाषण आर्थिक उपलब्धियों के साथ-साथ आगामी राजनीतिक बहस के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री के भाषण का केंद्रीय संदेश यह रहा कि भारत अब उस दौर से आगे निकल चुका है जब उसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के समूह में गिना जाता था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह देश की मौजूदा आर्थिक उपलब्धियों को स्वीकार करने के बजाय लगातार संदेह पैदा कर रहा है।
वहीं, GDP के आंकड़ों और आर्थिक नीतियों को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
