नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस तरह की त्रासदी के लिए सिर्फ इमारत या PG मालिक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित सरकारी और संस्थागत अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि राहत और बचाव अभियान में हर संभव प्रयास किया जाए, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बचाया जा सके।
MCD और DU की जवाबदेही पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अदालत का कहना था कि छात्रों और युवाओं की सुरक्षा केवल उस इमारत के मालिक की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। जिन सरकारी अथॉरिटीज पर इमारतों, PG और हॉस्टलों की निगरानी तथा नियमों के पालन की जिम्मेदारी है, उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि संबंधित अधिकारियों ने अपनी कानूनी और नियामकीय जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से पालन किया होता, तो इस तरह की घटनाओं को रोकने की संभावना हो सकती थी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि बचाव कार्य के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने प्रशासन को राहत और बचाव अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए।
एक सप्ताह में PG और हॉस्टलों का ऑडिट
सत्य निकेतन हादसे के बाद हाई कोर्ट ने MCD को एक सप्ताह के भीतर PG और हॉस्टलों का ऑडिट करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इमारत मालिकों की जिम्मेदारी तय करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। PG और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है।
ऑडिट के दौरान यह देखा जाना है कि संबंधित इमारतें सुरक्षा मानकों और लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
PG और हॉस्टल के लिए नियम नहीं तो तुरंत बनाएं
हाई कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि PG और हॉस्टलों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नियम या दिशा-निर्देश मौजूद नहीं हैं तो उन्हें तत्काल तैयार किया जाए।
अदालत ने खास तौर पर इस बात पर ध्यान देने को कहा कि PG और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं और हर कुछ समय बाद इसी तरह के हादसे देखने को मिलते हैं। इसलिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।
केंद्र और दिल्ली सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस
सत्य निकेतन हादसे को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत यह जानना चाहती है कि भविष्य में PG और हॉस्टल से जुड़ी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की क्या रणनीति है और मौजूदा व्यवस्था में किन सुधारों की जरूरत है।
‘भविष्य में ऐसा न हो’, कोर्ट ने मांगी रणनीति
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिकारियों से मूल सवाल पूछा कि हादसा हो चुका है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आपकी रणनीति क्या है?
अदालत का जोर केवल मौजूदा हादसे की जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि PG और हॉस्टल व्यवस्था को सुरक्षित एवं प्रभावी तरीके से रेगुलेट करने पर भी है।
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की गई है। तब तक संबंधित पक्षों को अदालत के निर्देशों के अनुसार अपनी रिपोर्ट और जवाब दाखिल करने होंगे।
सत्य निकेतन हादसे में हाई कोर्ट की टिप्पणी ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या हर हादसे के बाद केवल भवन मालिक को दोषी ठहराना पर्याप्त है, या फिर उन सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिन पर नियमों के पालन और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है?
