स्पोर्ट्स (Action Bharat) | ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में शानदार दोहरा शतक जड़कर एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का दमदार प्रदर्शन किया है। ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान की इस पारी ने न सिर्फ उनकी टीम को मजबूती दी, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका को लेकर ऋषभ पंत और ईशान किशन के बीच मुकाबले की चर्चा भी तेज कर दी है।
चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेले जा रहे फाइनल के दूसरे दिन ईशान ने बड़ी पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद उनकी नजर अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह मजबूत करने पर है।
पंत के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
ऋषभ पंत भारतीय टेस्ट टीम के अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। हालांकि, हाल के दौर में उनकी बल्लेबाजी को लेकर अपेक्षाओं के मुताबिक निरंतरता नहीं दिखाई देने की चर्चा रही है। कई मौकों पर उनके आक्रामक अंदाज के कारण वह अपना विकेट गंवाते नजर आए हैं।
दूसरी तरफ ईशान किशन लगातार अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं के सामने मजबूत दावा पेश कर रहे हैं। टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम में वापसी करने के बाद अब लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी यह बड़ी पारी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लाल गेंद में भी खुद को साबित कर रहे ईशान
ईशान की खासियत उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पारी को संभालकर आगे बढ़ाने की क्षमता भी है। टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक क्रीज पर टिकना भी महत्वपूर्ण होता है।
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में दोहरा शतक जमाकर ईशान ने दिखाया है कि वह लंबे प्रारूप में भी बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं।
अगर वह घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद से लगातार इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो चयनकर्ताओं के सामने भविष्य में विकेटकीपर-बल्लेबाज के विकल्प को लेकर फैसला और दिलचस्प हो सकता है।
भारत के लिए टेस्ट खेल चुके हैं ईशान
ईशान किशन पहले ही भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा रह चुके हैं। ऋषभ पंत के सड़क हादसे के कारण टीम से बाहर रहने के दौरान ईशान को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिला था।
उन्होंने भारत के लिए अब तक 2 टेस्ट मैच खेले हैं और 3 पारियों में 78 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक शामिल है।
हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन अभी बहुत बड़ा नहीं रहा है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन से वह एक बार फिर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं।
चयनकर्ताओं के लिए बढ़े विकल्प
ईशान किशन की यह दोहरी शतकीय पारी ऐसे समय आई है जब भारतीय क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका को लेकर विकल्पों की चर्चा लगातार बनी रहती है।
ऋषभ पंत का अनुभव और टेस्ट क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है, जबकि ईशान अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और हालिया घरेलू प्रदर्शन के दम पर चुनौती पेश कर रहे हैं।
फिलहाल ईशान के लिए सबसे जरूरी होगा कि वह लाल गेंद के क्रिकेट में लगातार बड़ी पारियां खेलकर अपनी निरंतरता साबित करें। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम के चयन के दौरान ईशान किशन का नाम निश्चित तौर पर गंभीरता से चर्चा में आ सकता है।
