बीजिंग (Action Bharat) | चीन में कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग की किताबों और भाषणों की लोकप्रियता उनकी मृत्यु के करीब 50 साल बाद एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि माओ की रचनाओं में दिलचस्पी रखने वालों में चीन की नई पीढ़ी यानी Gen Z और युवा प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक विकास की धीमी रफ्तार, रोजगार को लेकर अनिश्चितता, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आय की समानता को लेकर चिंता जैसे मुद्दों के बीच कुछ युवा माओ की रचनाओं को केवल राजनीतिक दस्तावेज के रूप में नहीं देख रहे हैं। वे इनमें मौजूदा मुश्किल परिस्थितियों से निपटने और संघर्ष का सामना करने के विचार तलाश रहे हैं।
• आर्थिक दबाव और बेरोजगारी के बीच बढ़ी दिलचस्पी
चीन के युवाओं के बीच माओ की रचनाओं की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। इनमें अर्थव्यवस्था की धीमी गति, बेरोजगारी, रोजगार की अनिश्चितता, शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा आय में असमानता को लेकर चिंता प्रमुख हैं।
ऐसे माहौल में युवाओं का एक वर्ग पुराने राजनीतिक विचारों को मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में पढ़ रहा है। उनके लिए माओ की रचनाएं केवल चीन के इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वर्तमान दबावों और चुनौतियों को समझने के एक माध्यम के रूप में भी सामने आ रही हैं।
• Gen Z माओ को इतिहास के बड़े किरदार के रूप में देखती है
रिपोर्ट के अनुसार चीन की Gen Z पीढ़ी माओ को इतिहास के एक बड़े किरदार के रूप में देखती है। इस पीढ़ी का बड़ा हिस्सा माओ की निजी स्मृतियों या उनके दौर के प्रत्यक्ष अनुभव से जुड़ा नहीं है। इसके बावजूद उनके विचारों और शब्दों को आज की परिस्थितियों के हिसाब से नए अर्थों में पढ़ा जा रहा है।
भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे युवाओं का एक वर्ग माओ के पुराने विचारों में आज की मुश्किल परिस्थितियों को समझने, उनका सामना करने और समाधान तलाशने के तरीके खोज रहा है।
• विश्वविद्यालयों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिख रहा असर
माओ की किताबों में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी के संकेत विश्वविद्यालयों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी दिखाई दे रहे हैं। इससे पता चलता है कि माओ से जुड़े साहित्य को लेकर रुचि केवल किसी एक छोटे समूह तक सीमित नहीं है।
प्रतिष्ठित शिंगहुआ विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पिछले साल सबसे ज्यादा जारी की जाने वाली किताब ‘सिलेक्टेड वर्क्स ऑफ माओत्से तुंग’ रही। यह आंकड़ा युवाओं और विद्यार्थियों के बीच माओ की रचनाओं की दोबारा बढ़ती रुचि का एक उल्लेखनीय संकेत माना जा रहा है।
• पुराने विचारों को आज की चुनौतियों से जोड़ रहे युवा
माओ की रचनाओं की ओर युवाओं के आकर्षण को रिपोर्ट आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ती है। रोजगार की चिंता, प्रतिस्पर्धा और भविष्य को लेकर असमंजस के बीच कुछ युवा माओ के संघर्ष और कठिन परिस्थितियों से निपटने वाले विचारों को अपने वर्तमान जीवन से जोड़कर देख रहे हैं।
इस प्रक्रिया में माओ की किताबों को पढ़ने का उद्देश्य जरूरी नहीं कि उनके पूरे राजनीतिक विचारों को स्वीकार करना हो। बल्कि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार युवा उनके विचारों को मौजूदा परिस्थितियों को समझने के लिए नए संदर्भ में पढ़ रहे हैं।
• माओ की मृत्यु के पांच दशक बाद बदला संदर्भ
माओत्से तुंग की मृत्यु के लगभग पांच दशक बाद उनकी किताबों का नई पीढ़ी के बीच फिर चर्चा में आना चीन के बदलते सामाजिक माहौल का एक दिलचस्प संकेत है। जिस पीढ़ी ने माओ के राजनीतिक दौर को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा, वह अब उनकी रचनाओं को अपने समय की समस्याओं के संदर्भ में पढ़ रही है।
आर्थिक दबाव और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच माओ की किताबों की ओर युवाओं का लौटना यह दिखाता है कि पुराने राजनीतिक साहित्य को नई पीढ़ी अपने मौजूदा सवालों के जवाब तलाशने के लिए अलग नजरिए से देख सकती है।
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