देहरादून की डिफेंस कॉलोनी में 250 करोड़ के कथित भूमि घोटाले का मामला, जांच के आदेश; हरित क्षेत्र के निजी इस्तेमाल का आरोप

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Action Bharat | देहरादून: शहर की प्रतिष्ठित डिफेंस कॉलोनी में 250 करोड़ रुपये से अधिक के कथित भूमि घोटाले और सार्वजनिक हरित क्षेत्रों को निजी उपयोग में लाए जाने का मामला सामने आया है। मामले में उत्तराखंड शासन के उपसचिव ने निबंधक सहकारी समितियां को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच कराने और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है। इस मामले में 11 फरवरी 2025 को 16 पूर्व सैन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।

• 1968 में स्थापित हुई थी डिफेंस कॉलोनी
शिकायतकर्ता कर्नल रमेश प्रसाद सिंह (सेनि.) के मुताबिक, डिफेंस कॉलोनी की स्थापना वर्ष 1968 में कैंटोनमेंट शैली के आवासीय क्षेत्र के रूप में की गई थी। मूल लेआउट में करीब 45 प्रतिशत क्षेत्र खुले स्थान, पार्क, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित बताया गया है।

• सार्वजनिक जमीन को निजी भूखंडों में बदलने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोसायटी के पूर्व प्रबंधन और अलग-अलग सचिवों के कार्यकाल में सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित स्थानों को कथित तौर पर निजी भूखंडों में परिवर्तित कर बेच दिया गया।

• 250 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का दावा
शिकायत में भूमि के मौजूदा सर्किल रेट और उस पर बने मकानों के मूल्य को आधार बनाते हुए कथित नुकसान का अनुमान 250 करोड़ रुपये से अधिक लगाया गया है। साथ ही एक लाख वर्गमीटर से अधिक हरित क्षेत्र प्रभावित होने का दावा किया गया है।

• पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर असर का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन के भू-उपयोग और स्वरूप में बदलाव से कॉलोनी के पर्यावरण, खुले क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

• 2024 में कथित अनधिकृत विक्रय विलेख का भी जिक्र
प्रतिवेदन में दावा किया गया है कि समिति के कार्यकाल को लेकर आपत्तियां होने के बावजूद 6 अप्रैल 2024 को एक कथित अनधिकृत विक्रय विलेख निष्पादित किया गया। शिकायत में प्रभावशाली लोगों के कॉलोनी में रहने का लाभ उठाकर प्रशासनिक कार्रवाई से बचने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।

• जांच समिति और बोर्ड बनाने की मांग
मामले में शहरी विकास एवं पर्यावरण विभाग के स्तर पर संयुक्त वैधानिक जांच समिति और बोर्ड गठित करने की मांग की गई है। साथ ही कथित अवैध संपत्ति निस्तारण संबंधी प्रस्तावों को रद्द करने और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

• अधिकारियों से नुकसान की वसूली की मांग
प्रतिवेदन में नेहरू कॉलोनी में दर्ज मुकदमे में नामित 15 अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षति और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली की कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की गई है।

फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। कथित भूमि घोटाले, हरित क्षेत्र के इस्तेमाल और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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