राइड से पहले Ola-Uber और Rapido पर टिप का विकल्प होगा बंद? सरकार ने कैब एग्रीगेटरों को दिया निर्देश

कारोबार

नई दिल्ली | कैब और बाइक-टैक्सी बुक करने वाले यात्रियों के लिए सरकार ने टिप देने की व्यवस्था को लेकर अहम निर्देश जारी किया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, यात्रा शुरू होने से पहले ही ग्राहक को ड्राइवर को टिप देने का विकल्प देना भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया है।

सरकार ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों को ऐसी व्यवस्था बंद करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

यात्रा से पहले टिप का विकल्प क्यों बना मुद्दा?

सरकार के मुताबिक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कैब एग्रीगेटरों के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। शिकायतों में प्रमुख मुद्दा यह था कि कुछ प्लेटफॉर्म पर ग्राहक को राइड शुरू होने से पहले ही ड्राइवर को टिप देने का विकल्प दिखाई देता था।

सरकार के अनुसार कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की कि उन्हें ऐसा महसूस कराया जा रहा था कि यदि वे पहले से टिप नहीं देंगे तो उन्हें राइड मिलने में परेशानी हो सकती है।

निधि खरे ने इसे उपभोक्ता के लिए भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए कहा कि टिप देना पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए।

टिप कब देना उचित माना गया?

सरकार के मौजूदा रुख के मुताबिक टिप का फैसला राइड पूरी होने के बाद ग्राहक पर छोड़ा जाना चाहिए।

यानी यात्री को पहले से यह तय करने के लिए प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए कि वह ड्राइवर को टिप देगा या नहीं।

सरकार का तर्क

  • टिप ग्राहक की स्वैच्छिक पसंद है।
  • यात्रा से पहले टिप का विकल्प ग्राहक के निर्णय को प्रभावित कर सकता है।
  • टिप का फैसला राइड पूरी होने के बाद करने का विकल्प होना चाहिए।
  • ग्राहक पर टिप देने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं होना चाहिए।

Rapido पर लगा ₹10 लाख का जुर्माना

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने बाइक-टैक्सी और कैब सेवा प्लेटफॉर्म Rapido पर कथित अनुचित व्यापार गतिविधियों को लेकर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक CCPA की कार्रवाई में यात्रा शुरू होने से पहले ड्राइवर को टिप देने के विकल्प से जुड़ी व्यवस्था भी शामिल थी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि Rapido के खिलाफ कार्रवाई व्यापक जांच के संदर्भ में की गई है।

Ola और Uber की गतिविधियों की भी जांच

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक प्राधिकरण केवल Rapido तक सीमित नहीं है।

Ola और Uber जैसे प्रमुख कैब सेवा प्रदाताओं की कारोबारी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। इस जांच में कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म की अलग-अलग व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार जांच के दायरे में मुख्य रूप से—

  • यात्रा से पहले टिप देने का विकल्प,
  • डायनेमिक प्राइसिंग यानी किराए में मांग के अनुसार बदलाव,
  • और उपभोक्ताओं के अनुभव से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं

शामिल हैं।

डायनेमिक प्राइसिंग भी जांच के दायरे में

कैब सेवाओं में डायनेमिक प्राइसिंग यानी मांग और उपलब्धता के आधार पर किराए में बदलाव भी उपभोक्ता मामलों के प्राधिकरण की जांच का हिस्सा है।

पीक टाइम, खराब मौसम, बड़े आयोजनों या किसी विशेष क्षेत्र में अधिक मांग के समय कैब का किराया बढ़ सकता है। सरकार यह देख रही है कि इस तरह की व्यवस्था उपभोक्ताओं के सामने किस तरीके से प्रस्तुत की जाती है और क्या इससे उन्हें पर्याप्त जानकारी मिलती है।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

यदि सरकार के निर्देश के अनुरूप प्लेटफॉर्म अपनी व्यवस्था में बदलाव करते हैं, तो यात्रियों को राइड बुक करते समय या राइड शुरू होने से पहले टिप देने के लिए प्रेरित करने वाली व्यवस्था हटाई जा सकती है।

इसके बजाय टिप का विकल्प यात्रा समाप्त होने के बाद दिया जाना अपेक्षित है।

इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राइवर को टिप देना बंद हो जाएगा। टिप देना ग्राहक की इच्छा पर निर्भर रहेगा, लेकिन सरकार का जोर इस बात पर है कि यह फैसला राइड से पहले किसी दबाव या प्रभाव के बिना किया जाए।

खबर की बड़ी बातें

  • सरकार ने यात्रा से पहले टिप देने के विकल्प को भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
  • कैब एग्रीगेटरों को ऐसी व्यवस्था बंद करने का निर्देश दिया गया।
  • सरकार के अनुसार टिप पूरी तरह स्वैच्छिक होनी चाहिए।
  • टिप का विकल्प यात्रा पूरी होने के बाद देना उचित माना गया है।
  • CCPA ने Rapido पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है।
  • Ola और Uber की कारोबारी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
  • डायनेमिक प्राइसिंग से जुड़ी व्यवस्थाएं भी जांच के दायरे में हैं।
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कैब एग्रीगेटरों को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने की बात कही गई है।

Action Bharat | नई दिल्ली

सरकार का यह कदम कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं में उपभोक्ताओं के सामने आने वाले शुल्क और भुगतान संबंधी विकल्पों को लेकर पारदर्शिता पर केंद्रित है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म की कौन-कौन सी व्यवस्थाएं उपभोक्ता संरक्षण नियमों के अनुरूप पाई जाती हैं।

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