नई दिल्ली (Action Bharat) | आंध्र प्रदेश के अन्नावरम स्थित श्री वीरा वेंकट सत्यनारायण स्वामी मंदिर परिसर में पानी की बोतल पर MRP से ₹7 ज्यादा वसूलना एक दुकानदार को भारी पड़ गया। मामले में उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को कुल ₹15,007 देने का आदेश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला 22 फरवरी 2026 का है। डी. वेंकटेश्वर राव नाम के एक श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर परिसर में लाइसेंसी द्वारा संचालित दुकान से 1 लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतल खरीदी।
बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP ₹18 अंकित था, लेकिन दुकानदार ने UPI के जरिए उनसे ₹25 का भुगतान लिया।
इस तरह शिकायतकर्ता के मुताबिक पानी की बोतल के लिए उनसे ₹7 अतिरिक्त वसूले गए।
मंदिर प्रशासन में भी की थी शिकायत
राव ने अतिरिक्त पैसे वसूले जाने पर दुकानदार से सवाल किया। उनके मुताबिक दुकानदार ने दावा किया कि उसे MRP से अधिक कीमत पर पानी बेचने की अनुमति है।
इसके बाद राव ने मंदिर प्रशासन को WhatsApp के जरिए शिकायत की। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वहां से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
दुकानदार ने क्या सफाई दी?
मामला आयोग के सामने पहुंचने के बाद दुकानदार ने ₹7 अधिक वसूलने के आरोप से इनकार किया।
दुकानदार की ओर से दावा किया गया कि ₹25 सिर्फ पानी की बोतल के लिए नहीं लिए गए थे। उसके अनुसार श्रद्धालु ने ₹20 का एक कोल्ड ड्रिंक और ₹5 का बिस्किट भी खरीदा था, इसलिए कुल भुगतान ₹25 हुआ।
हालांकि, आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
UPI रिकॉर्ड और फोटो बने अहम सबूत
मामले में आयोग ने UPI भुगतान का रिकॉर्ड और पानी की बोतल की तस्वीर देखी। आयोग ने भुगतान के समय और तस्वीर खींचे जाने के समय का भी मिलान किया।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने इन सबूतों को शिकायतकर्ता के दावे के समर्थन में माना। वहीं दुकानदार अपने दावे के समर्थन में विश्वसनीय दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
शिकायतकर्ता को मिलेंगे ₹15,007
28 अगस्त 2026 को पारित आदेश में आयोग ने दुकानदार को शिकायतकर्ता को कुल ₹15,007 देने का निर्देश दिया है।
इसमें शामिल हैं:
- ₹7 — अतिरिक्त वसूली की गई रकम की वापसी
- ₹10,000 — मुआवजा
- ₹5,000 — मुकदमे और कानूनी खर्च
इसके अलावा दुकानदार को ₹7 लाख कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया गया है।
45 दिन में करना होगा भुगतान
उपभोक्ता आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन की समयसीमा दी है।
अगर निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो बकाया राशि पर डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान होने तक 9% सालाना ब्याज भी देना होगा।
₹7 की अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ मामला, लाखों का आदेश
इस मामले में मूल विवाद महज ₹7 की अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ था, लेकिन उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद दुकानदार पर ₹7 लाख की राशि कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा कराने और शिकायतकर्ता को ₹15,007 देने की जिम्मेदारी आई है।
