कोलकाता (Action Bharat) | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अपनी प्रतिक्रिया दी। कालीघाट स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने आयोग के फैसले को ‘लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन’ बताया और कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि मूल पार्टी के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर उनकी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी।
चुनाव आयोग ने TMC के भीतर सामने आए दो गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के बाद दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
‘फुटबॉल खिलाड़ी’ सिंबल को ममता ने अंतिम समाधान नहीं माना
चुनाव आयोग की ओर से वैकल्पिक नाम और चिह्न मिलने के बावजूद ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि इसे मूल TMC के नाम और चिह्न पर अपने दावे की समाप्ति नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि उपचुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, नामांकन पूरे हो चुके थे और प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न भी मिल चुके थे। ऐसे में आयोग की ओर से इस स्तर पर अंतरिम व्यवस्था लागू किए जाने के समय पर उन्होंने सवाल उठाया।
ममता के अनुसार, उनके गुट ने वैकल्पिक नाम और चिह्न केवल चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्वीकार किए हैं। इसे चुनाव आयोग के मूल फैसले की स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए।
‘न मैं झुकूंगी, न आत्मसमर्पण करूंगी’
ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस फैसले के सामने न झुकेंगी और न आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने पार्टी की मूल पहचान हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते से संघर्ष जारी रखने की बात कही।
ममता ने दावा किया कि करीब 29 वर्षों के राजनीतिक संघर्ष के जरिए उन्होंने पार्टी को खड़ा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘जोड़ा फूल’ वाला चुनाव चिह्न पिछले लगभग 28 वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की पहचान रहा है।
उन्होंने बताया कि उनके गुट ने जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हुए संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने पेश किए हैं। साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गुट के संगठनात्मक दावों पर भी सवाल उठाया।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को दिए नए नाम और सिंबल
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों गुटों की दावेदारी के बीच चुनाव आयोग ने फिलहाल दोनों को अलग-अलग पहचान दी है।
ममता बनर्जी गुट:
- नाम: ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस
- चुनाव चिह्न: फुटबॉल खिलाड़ी
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट:
- नाम: डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस
- चुनाव चिह्न: लिफाफा
आयोग ने मूल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतिम निर्णय आने तक रोक लगाई है।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को तृणमूल की ‘सिस्टर पार्टी’ बताते हुए कहा कि इस समर्थन का उद्देश्य विपक्षी इंडिया गठबंधन को मजबूत करना है।
स्रोत के अनुसार, संचिता प्रधान दे ने नामांकन वापस लेने से पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात भी की थी।
विपक्षी नेताओं से संपर्क का भी दावा
ममता बनर्जी ने कहा कि TMC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज किए जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और अन्य विपक्षी नेताओं ने फोन पर उनसे संपर्क किया।
उन्होंने कहा कि उनका गुट इस राजनीतिक लड़ाई में अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर आगे बढ़ेगा।
महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का भी किया जिक्र
ममता बनर्जी ने अपने बयान में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों और संस्थाओं के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों को लेकर चिंता पैदा होती है। ये आरोप ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक विवाद के बाद पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों ने दावा किया। इसी विवाद पर सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल नाम और चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया।
इसके बाद दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न मांगे गए और उन्हें अलग-अलग पहचान दी गई।
ममता बनर्जी का कहना है कि वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न स्वीकार करना केवल चुनाव प्रक्रिया को जारी रखने की आवश्यकता थी और इससे उनके गुट का मूल TMC नाम तथा ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न पर दावा खत्म नहीं होता।
अब नजर कानूनी लड़ाई पर
ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लड़ाई जारी रखेंगी।
फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जबकि मूल TMC नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चिह्न पर विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है।
