नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदूषण हॉटस्पॉट की मैपिंग, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और लंबित सड़क एवं सिविल कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
हॉटस्पॉट की होगी मैपिंग
जिला स्तर पर अधिकारियों को AQI निगरानी डेटा के आधार पर प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने और हॉटस्पॉट का मानचित्र तैयार करने को कहा गया है।
हर हॉटस्पॉट में प्रदूषण के संभावित स्रोतों का आकलन किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- सड़क की धूल
- यातायात जाम और वाहन उत्सर्जन
- निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां
- अनधिकृत पार्किंग
- खुले या ढके न हुए क्षेत्र
- बायोमास और कचरा जलाना
इसके अलावा, जहां जरूरी होगा, हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की भी जांच की जाएगी।
31 अक्टूबर तक सड़क कार्य पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने संबंधित एजेंसियों को प्राथमिकता के आधार पर लंबित सड़क और सिविल कार्यों को 31 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
इनमें मुख्य रूप से:
- गड्ढों की मरम्मत
- सड़क किनारे के कार्य
- ब्राउन एरिया का उपचार एवं विकास
- अन्य लंबित सड़क कार्य
शामिल हैं। पूरे किए गए कार्यों के उचित रखरखाव पर भी जोर दिया गया है, ताकि सड़क की धूल को कम किया जा सके।
PM10 और PM2.5 वाले इलाकों पर विशेष निगरानी
अधिकारियों को उन स्थानों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है जहां PM10 और PM2.5 का स्तर अधिक रहता है।
खास तौर पर भारी यातायात, भारी वाहनों की पार्किंग, सड़क पर ज्यादा धूल और लगातार जाम वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
स्रोत के हिसाब से बनेगी कार्ययोजना
प्रत्येक प्रदूषण हॉटस्पॉट के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें प्रदूषण के स्रोत, सुधारात्मक उपाय, जिम्मेदार एजेंसी और कार्रवाई की समयसीमा स्पष्ट होगी।
जहां किसी दूसरी परियोजना के कारण सड़क का काम तुरंत पूरा नहीं हो सकता, वहां सड़क की सतह बहाल होने तक पानी का छिड़काव और अन्य धूल नियंत्रण उपाय जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
