26 साल से सत्ता के केंद्र में पुतिन, फिर रूस में क्यों होते हैं चुनाव? समझिए मॉस्को की राजनीति का पूरा गणित

विदेश

मॉस्को (Action Bharat) | रूस में 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर देश की राजनीतिक व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी को आधिकारिक प्रारंभिक नतीजों में 57.83 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी के 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें जीतने की स्थिति में होने की जानकारी केंद्रीय चुनाव आयोग ने दी। इससे पार्टी का संवैधानिक बहुमत बरकरार रहा।

लेकिन इसी के साथ सवाल उठता है—अगर रूस की सत्ता व्यवस्था में पुतिन लंबे समय से केंद्रीय भूमिका में हैं, तो चुनाव क्यों होते हैं और एक आम रूसी मतदाता के वोट का महत्व क्या है?

पहले समझिए रूस में चुनाव किसके लिए हुआ?

2026 का चुनाव रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के सभी 450 सदस्यों के लिए हुआ।

इन 450 सीटों का चुनाव दो तरीकों से होता है—

  • 225 सीटें पार्टी-लिस्ट के जरिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुनी जाती हैं।
  • 225 सीटें सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं।
  • पार्टी-लिस्ट व्यवस्था में संसद में प्रवेश के लिए सामान्य तौर पर 5 प्रतिशत वोट की सीमा महत्वपूर्ण है।

इसलिए मतदाता का वोट केवल राष्ट्रपति चुनने से जुड़ा नहीं होता, बल्कि संसद की संरचना तय करने में भी भूमिका निभाता है।

यूनाइटेड रशिया को कितनी सीटें मिलीं?

केंद्रीय चुनाव आयोग के 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार यूनाइटेड रशिया को 57.83 प्रतिशत पार्टी-लिस्ट वोट मिले।

इसके आधार पर पार्टी के पास स्टेट ड्यूमा की 355 सीटें जाने की बात सामने आई। 450 में से 355 सीटों के साथ पार्टी के पास संवैधानिक बहुमत बना रहेगा।

2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया को आधिकारिक तौर पर 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे। यानी आधिकारिक वोट शेयर में इस बार वृद्धि दर्ज की गई।

355 सीटों का मतलब क्या है?

स्टेट ड्यूमा में संवैधानिक बहुमत का महत्व सामान्य बहुमत से अलग है।

यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की स्थिति में पार्टी के पास—

  • सामान्य कानूनों को पारित करने की मजबूत संसदीय स्थिति होगी।
  • संवैधानिक संशोधनों की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त संख्या होगी।
  • संसद में विपक्षी दलों के समर्थन पर उसकी निर्भरता कम रहेगी।

हालांकि किसी कानून या संवैधानिक प्रक्रिया की वास्तविक प्रक्रिया रूस के संवैधानिक और संसदीय नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

फिर एक वोट का महत्व क्या है?

यह कहना सही नहीं होगा कि सत्ताधारी पार्टी के मजबूत होने के कारण हर मतदाता का वोट स्वतः महत्वहीन हो जाता है।

पार्टी-लिस्ट चुनाव में किसी व्यक्ति का एक वोट राष्ट्रीय स्तर के कुल वोटों का बहुत छोटा हिस्सा होता है, लेकिन लाखों वोट मिलकर यह तय करते हैं कि कौन-कौन सी पार्टियां संसद में प्रवेश करेंगी और उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी।

दूसरी ओर, सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला अपेक्षाकृत स्थानीय होता है। यहां कुछ हजार वोटों का अंतर सीधे किसी उम्मीदवार की जीत या हार तय कर सकता है।

यानी रूस की चुनाव प्रणाली में एक वोट का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के चुनाव में डाला जा रहा है और मुकाबला कितना करीबी है।

पुतिन और यूनाइटेड रशिया का संबंध

व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से रूस की राजनीति के केंद्रीय नेताओं में रहे हैं। यूनाइटेड रशिया पार्टी उनके शासन का प्रमुख संसदीय आधार है।

हालांकि तकनीकी रूप से रूस के राष्ट्रपति और यूनाइटेड रशिया पार्टी अलग संवैधानिक संस्थाएं हैं। संसदीय चुनाव राष्ट्रपति का सीधा चुनाव नहीं होता।

इसलिए स्टेट ड्यूमा चुनाव में यूनाइटेड रशिया की जीत को सीधे राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम के रूप में देखना संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा। इसका मुख्य प्रभाव संसद की संरचना और विधायी शक्ति पर पड़ता है।

2026 का चुनाव क्यों महत्वपूर्ण माना गया?

यह चुनाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव था। राष्ट्रपति पुतिन ने चुनाव को युद्ध और सरकार की नीतियों के लिए समर्थन की परीक्षा के रूप में पेश किया था।

रूसी अधिकारियों ने परिणामों को सरकार और देश की एकजुटता के समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया है।

दूसरी ओर, कुछ विपक्षी और पश्चिमी स्रोतों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, विपक्षी उम्मीदवारों की भागीदारी और मतदान की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। इन दावों और आधिकारिक रूसी परिणामों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

संसद में बाकी दलों की स्थिति

आधिकारिक प्रारंभिक परिणामों के अनुसार यूनाइटेड रशिया के अलावा कई अन्य दल भी ड्यूमा में पहुंचे हैं।

रॉयटर्स के अनुसार—

  • कम्युनिस्ट पार्टी को लगभग 13.81 प्रतिशत वोट मिले।
  • LDPR को लगभग 8.98 प्रतिशत।
  • न्यू पीपल पार्टी को लगभग 7.96 प्रतिशत।
  • जस्ट रशिया ने भी संसद में प्रवेश के लिए जरूरी सीमा के आसपास प्रदर्शन किया।

इससे स्पष्ट है कि रूस में संसदीय चुनाव केवल एक पार्टी के नाम पर होने वाली प्रक्रिया नहीं है; अलग-अलग दल चुनाव लड़ते हैं और संसद में सीटें प्राप्त करते हैं। हालांकि विपक्षी दलों की वास्तविक राजनीतिक स्वतंत्रता और चुनावी प्रतिस्पर्धा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बना हुआ है।

चुनाव होते क्यों हैं?

रूस जैसे संसदीय चुनाव वाले राष्ट्रपति शासन में चुनाव के कई औपचारिक और राजनीतिक उद्देश्य होते हैं—

  1. संसद का गठन — कानून बनाने वाली संस्था के सदस्यों का चुनाव।
  2. राजनीतिक समर्थन का आकलन — सरकार और प्रमुख दलों के लिए जनता के समर्थन का संकेत।
  3. स्थानीय प्रतिनिधित्व — सिंगल-मेंबर क्षेत्रों के जरिए स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव।
  4. राजनीतिक वैधता का प्रदर्शन — सरकार चुनाव परिणामों को अपने जनसमर्थन के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।
  5. सत्ता संरचना को संस्थागत रूप देना — संसद में बहुमत के जरिए सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने की क्षमता तय होती है।

तो क्या चुनाव सिर्फ औपचारिकता हैं?

इस सवाल का जवाब राजनीतिक व्यवस्था के अलग-अलग आकलनों पर निर्भर करता है।

रूसी सरकार और चुनाव अधिकारियों के अनुसार चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होते हैं और मतदाता इसमें भाग लेते हैं। वहीं कुछ विपक्षी नेताओं, पश्चिमी सरकारों और स्वतंत्र विश्लेषकों ने चुनावी प्रतिस्पर्धा, उम्मीदवारों की उपलब्धता, मीडिया वातावरण और मतदान प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं।

इसलिए रूस के चुनावों को समझने के लिए आधिकारिक परिणामों और चुनावी प्रक्रिया पर उठे विवाद—दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

Action Bharat | World Politics Desk

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