कौन हैं एडमिरल सैमुअल पापारो? टॉप गन के ‘आइसमैन’ से लेकर इंडो-पैसिफिक के शीर्ष कमांडर तक का सफर

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वॉशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिकी नौसेना के चार सितारा एडमिरल सैमुअल पापारो का नाम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुखता से सामने आता है। यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख के तौर पर उनके जिम्मे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य समन्वय है।

पापारो की सैन्य सोच का एक अहम पहलू यह है कि किसी सैन्य कमांडर की सफलता केवल युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि युद्ध की स्थिति पैदा होने से रोकने में भी है।

‘टॉप गन’ के मावेरिक नहीं, आइसमैन बने प्रेरणा

सैमुअल पापारो के सैन्य करियर से जुड़ी एक दिलचस्प घटना उनके कॉलेज के दिनों की है। 1986 में पेंसिल्वेनिया में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपनी मंगेतर मॉरीन के साथ हॉलीवुड फिल्म ‘टॉप गन’ देखी थी।

फिल्म में टॉम क्रूज का किरदार मावेरिक उस समय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय था, लेकिन पापारो को फिल्म का दूसरा पायलट किरदार ‘आइसमैन’ ज्यादा पसंद आया।

आइसमैन का शांत स्वभाव, अनुशासन और परिस्थितियों का आकलन करके निर्णय लेने की क्षमता पापारो को प्रभावित करती थी। रिपोर्ट के अनुसार, यही गुण बाद में उनके सैन्य दृष्टिकोण में भी दिखाई दिए।

परिवार से मिला सैन्य सेवा का संस्कार

पापारो का परिवार अमेरिकी सैन्य सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता सैमुअल पापारो सीनियर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स में थे और बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर्स से जुड़े रहे।

उनके दादा ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसेना के निर्माण दस्ते में सेवा की थी। वहीं उनकी मां ने दक्षिण फिलाडेल्फिया में काम करके परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं।

पापारो अपने परिवार की पहली पीढ़ी के सदस्य थे जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। विलानोवा से स्नातक करने के बाद उन्होंने अमेरिकी नौसेना में फाइटर पायलट के तौर पर करियर शुरू किया और आगे चलकर शीर्ष कमांड पदों तक पहुंचे।

इंडो-पैसिफिक कमांड की कमान क्यों महत्वपूर्ण?

यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमानों में से एक है। इसका क्षेत्र प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के बड़े हिस्से तक फैला है।

पापारो के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैन्य और असैन्य कर्मी, नौसैनिक पोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और लड़ाकू विमान इस व्यापक क्षेत्र में तैनात रहते हैं।

इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण इस कमांड की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। विशेष रूप से ताइवान जलडमरूमध्य, दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर रहती है।

ताइवान को लेकर बड़ी रणनीतिक चुनौती

पापारो के सामने प्रमुख चुनौतियों में चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और ताइवान को लेकर तनाव शामिल है। अमेरिका ताइवान की सुरक्षा को लेकर चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में है, जबकि बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

ऐसे माहौल में अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य क्षेत्र में सैन्य संतुलन बनाए रखना और संभावित संघर्ष को रोकने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।

विवादों से दूर, सैन्य रणनीति पर जोर

पापारो सार्वजनिक तौर पर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी से दूरी रखने और सैन्य आकलन पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। उनका दृष्टिकोण युद्ध की तैयारी के साथ-साथ संघर्ष को रोकने की रणनीति पर भी केंद्रित है।

उनकी भूमिका ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका, चीन और अन्य देशों के बीच सैन्य एवं रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

पापारो के दृष्टिकोण का मूल विचार यही है कि एक सैन्य कमांडर की सबसे बड़ी सफलता केवल युद्ध के मैदान में जीत हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां तैयार करना भी है जिनमें युद्ध होने की नौबत ही न आए।

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