किसके पास रहेगा TMC का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न? सुप्रीम कोर्ट ने तय की डेडलाइन

राजनीति

नई दिल्ली (Action Bharat) | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समय-सीमा के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा है।

तीन महीने में फैसला करेगा चुनाव आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद चुनाव आयोग तीन महीने के भीतर TMC के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर अंतिम निर्णय करे। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर करीब चार महीने की समय-सीमा तय हुई है।

चुनाव आयोग की ओर से इस विवाद को तय करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था, लेकिन अदालत ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना।

अभी किसके पास है ‘फूल और घास’ का निशान?

विवाद के अंतिम निपटारे तक चुनाव आयोग ने All India Trinamool Congress नाम और ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न को फ्रीज कर रखा है। दोनों गुट फिलहाल इस मूल नाम और चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

आगामी उपचुनावों के लिए आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी के गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न, जबकि दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ और लिफाफा चिह्न दिया गया है।

विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

यह मामला ममता बनर्जी की उस याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। अब अंतिम रूप से किस गुट को पार्टी का नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न मिलेगा, इसका निर्णय चुनाव आयोग को तय प्रक्रिया के तहत करना है।

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