6.31 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी का खुलासा, 4 आरोपी गिरफ्तार; एक खाते में 90 लाख के संदिग्ध लेन-देन का पता

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पटना (Action Bharat) | बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 6 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए समस्तीपुर से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में ठगी की कुल रकम करीब 6 करोड़ 31 लाख रुपये सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष कुमार गिरि, अक्षय कुमार झा, राजाराम पोद्दार और दरभंगा निवासी नवीन कुमार दास के रूप में हुई है।

म्यूल खातों के जरिए हो रहा था रकम का लेन-देन

पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से बैंक चेकबुक, चार मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंकिंग एवं डिजिटल लेन-देन से संबंधित सामग्री बरामद की गई है।

जांच एजेंसी इन दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के जरिए ठगी की रकम के प्रवाह का पता लगाने में जुटी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और आगे कहां ट्रांसफर की गई।

NCRP पर मिली शिकायत से शुरू हुई जांच

मामले की जांच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मिली शिकायत के बाद शुरू हुई। पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बैंक खाते का सत्यापन कराया।

तकनीकी जांच के दौरान संबंधित खाते में डिजिटल अरेस्ट के जरिए हुई साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के संकेत मिले। इसके बाद वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाला गया।

एक बैंक खाते में 90 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों में से एक के बैंक खाते में करीब 90 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला। पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर समस्तीपुर साइबर थाने में कांड संख्या 48/2026 दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज की।

पहले खाताधारक गिरफ्तार, फिर सामने आए अन्य नाम

पुलिस ने सबसे पहले संबंधित बैंक खाते के खाताधारक मनीष कुमार गिरि को समस्तीपुर के विद्यापतिनगर से गिरफ्तार किया।

पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने अन्य संदिग्धों तक पहुंच बनाई। इसके बाद अक्षय कुमार झा, राजाराम पोद्दार और नवीन कुमार दास को भी गिरफ्तार किया गया।

पूरे साइबर नेटवर्क की जांच जारी

चारों आरोपियों से पूछताछ के साथ पुलिस अब डिजिटल अरेस्ट ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े साक्ष्यों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन खातों में गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

Action Bharat | साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, PIN या पैसे ट्रांसफर न करें। संदिग्ध साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें।

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