वाशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक पूर्व छात्रा से जुड़े कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच दोबारा शुरू होने के बाद मामला चर्चा में है। घटना कथित तौर पर 2024 में न्यूयॉर्क के इथाका स्थित कॉर्नेल के एक फ्रेटरनिटी हाउस में हुई थी। अदालत में दाखिल दीवानी मुकदमे में सात छात्रों पर यौन हिंसा के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अदालती दस्तावेजों में पीड़िता की पहचान ‘जेन डो’ के रूप में की गई है। मुकदमे में विंस्टन ली, स्कॉट क्रेट्जस्मार, स्कॉट नॉरिस, मैथ्यू इंगल्स, जोनाथन नेवेल, गिलियो लोपेज और डिएगो सराबिया के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज हैं। ये आरोप हैं और अदालत में अभी इनका अंतिम रूप से प्रमाणित होना बाकी है।
नशीला पदार्थ देने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों और अदालत में दायर याचिका के अनुसार, घटना के समय पीड़िता 20 वर्ष की थी और वह अपने एक दोस्त से मिलने फ्रेटरनिटी हाउस गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शराब के प्रभाव में होने के दौरान दो छात्रों ने उसे केटामाइन नामक पदार्थ का सेवन करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसके साथ कथित तौर पर यौन हिंसा की गई।
याचिका के मुताबिक, पीड़िता के अचेत होने के बाद एक आरोपी ने कथित तौर पर एक निजी स्नैपचैट ग्रुप में संदेश भेजकर अन्य छात्रों को कमरे में बुलाया। शिकायत में आरोप है कि इसके बाद कई लोगों ने उसके साथ यौन हिंसा की।
मामले से संबंधित कुछ कथित चैट के स्क्रीनशॉट भी अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए हैं।
घटना के करीब तीन सप्ताह बाद शिकायत
पीड़िता ने कथित घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद यूनिवर्सिटी पुलिस विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
पीड़िता के वकील के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने मामले की आंतरिक जांच की थी। वकील का दावा है कि सात आरोपियों में से दो को निष्कासित किया गया, जबकि अन्य के खिलाफ अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
पीड़िता ने बाद में यूनिवर्सिटी और आरोपी छात्रों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया। मुकदमे में यूनिवर्सिटी पर छात्रों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने और मामले को उचित तरीके से नहीं संभालने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने उस समय गिरफ्तारी नहीं की
टॉम्पकिंस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के अनुसार, पुलिस जांच की पहले विस्तृत समीक्षा की गई थी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि उस समय आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले थे।
अब मामले की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इसका उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों और पहले की जांच को नए सिरे से देखना है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उसके आचार संहिता कार्यालय ने निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत मामले की जांच की थी। विश्वविद्यालय के अनुसार, संबंधित फ्रेटरनिटी विंग को कैंपस से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
हालांकि, छात्र गोपनीयता कानूनों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय ने संबंधित छात्रों के खिलाफ की गई व्यक्तिगत अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
वहीं, काई फाई फ्रेटरनिटी के राष्ट्रीय संगठन ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही है।
अब आपराधिक जांच पर नजर
मामले में फिलहाल आरोपों, विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्रवाई और पहले की पुलिस जांच की दोबारा समीक्षा की जा रही है। आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियों और अदालत के सामने कौन से साक्ष्य स्वीकार किए जाते हैं और उन पर क्या निष्कर्ष निकलता है।
Action Bharat | यह मामला अदालत में विचाराधीन आरोपों से जुड़ा है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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