नई दिल्ली, Action Bharat | विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित “वोट चोरी” के मुद्दे पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा। 28 सितंबर को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में नड्डा ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं पर चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
नड्डा ने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा, “सौ बार झूठ दोहराने से वह सच नहीं बन जाता, सच पराजित नहीं हो सकता।” उन्होंने विपक्ष की रणनीति को “टूलकिट मानसिकता” बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार आरोप लगाकर देश के माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर विवाद
SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलावों पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया है। यह विवाद फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
नड्डा ने कहा कि विपक्ष के आरोप तथ्यों की कसौटी पर टिक नहीं रहे हैं और चुनाव आयोग की ओर से इन पर स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद विपक्ष इन्हें दोहरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर निशाना
नड्डा ने अपने बयान में राहुल गांधी के अलावा अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का भी नाम लिया। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर “टूलकिट मानसिकता” के तहत काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके मुताबिक विपक्ष का उद्देश्य सरकार और संस्थाओं के खिलाफ लगातार नए आरोप खड़े करना है।
नड्डा ने विपक्ष पर वंशवादी राजनीति और सत्ता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय मुद्दों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। ये नड्डा और भाजपा की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; विपक्ष इन मुद्दों पर अलग-अलग आपत्तियां और दावे रखता रहा है।
विपक्ष का चुनाव आयोग पर अलग रुख
दूसरी ओर, कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन भी किए हैं।
इस पूरे विवाद में एक तरफ भाजपा चुनाव आयोग का बचाव कर रही है, जबकि विपक्ष मतदाता सूची में कथित बदलावों और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति से यह विवाद और स्पष्ट हो सकता है।
