भारत से बांग्लादेश भेजे जाने के बाद लापता मुमताज बेगम की तलाश, गुवाहाटी HC ने MEA को दिए निर्देश

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नई दिल्ली, Action Bharat | असम की 43 वर्षीय मुमताज बेगम को भारत से बांग्लादेश भेजे जाने के बाद उनके ठिकाने का पता नहीं चल पा रहा है। बांग्लादेश में स्थानीय अधिकारी और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग उनकी तलाश कर रहे हैं। वहीं, गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) को मुमताज का पता लगाने और उन्हें वापस भारत लाने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया है।

मुमताज को 14 जून 2026 की रात असम के कछार जिले के कलाइनचेरा क्षेत्र से बांग्लादेश भेजे जाने की बात हाई कोर्ट के समक्ष दाखिल दस्तावेजों में दर्ज है। कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्हें पहले विदेशी घोषित किया गया था, लेकिन बाद की न्यायिक कार्यवाही में उनके मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रक्रिया पर सवाल उठे।

बांग्लादेश में तलाश जारी

मुमताज के बांग्लादेश पहुंचने के बाद से उनका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिलहट और आसपास के इलाकों में स्थानीय पुलिस तथा सिविल सोसाइटी के सदस्य तलाश में जुटे हैं। उनकी पहचान संबंधी जानकारी और तस्वीर के साथ स्थानीय अखबारों में भी अपील प्रकाशित की गई थी।

बांग्लादेश के अधिकारियों ने कहा है कि मुमताज की तलाश की जा रही है और भारत की ओर से आधिकारिक जानकारी का भी इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल उनके वर्तमान स्थान की पुष्टि नहीं हुई है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

गुवाहाटी हाई कोर्ट में दाखिल मामले के अनुसार, मुमताज बेगम को 2019 में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। उन्होंने अपने भारतीय नागरिक होने के समर्थन में दस्तावेज पेश किए थे। रिकॉर्ड में उनके दादा के 1965 और 1970 के मतदाता सूची रिकॉर्ड, पिता के 1977 के मतदाता सूची रिकॉर्ड और वोटर आईडी, ग्राम पंचायत एवं गांव-बूढ़ा प्रमाणपत्र, स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और जमीन से जुड़े दस्तावेजों का उल्लेख है।

मामले में बाद की कार्यवाही के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि मुमताज को संबंधित ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देने का प्रभावी अवसर मिला या नहीं।

14 जून को बांग्लादेश भेजे जाने का रिकॉर्ड

हाई कोर्ट में BSF की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, मुमताज को 13 जून को असम पुलिस की ओर से BSF को सौंपा गया था। इसके बाद 13 और 14 जून की मध्यरात्रि के दौरान उन्हें कछार के कलाइनचेरा क्षेत्र से बांग्लादेश भेजा गया। BSF ने अदालत को बताया कि उसकी भूमिका राज्य अधिकारियों द्वारा जारी आदेश को लागू करने तक सीमित थी।

मुमताज के पति मुजम्मेल हक ने उनकी रिहाई और भारत वापसी के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

परिवार को सूचना नहीं देने पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

3 सितंबर 2026 के अपने आदेश में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कहा कि मुमताज को भारत से बाहर भेजे जाने से पहले उनके पति या परिवार के किसी वयस्क सदस्य को उनकी हिरासत की जानकारी नहीं दी गई थी। इसी आधार पर अदालत ने असम सरकार को उनके पति को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि विदेश मंत्रालय मुमताज को बांग्लादेश में तलाशने और उन्हें भारत वापस लाने के लिए आवश्यक प्रयास करे, ताकि उन्हें अपने मामले में उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का अवसर मिल सके।

कोर्ट ने भविष्य के लिए भी दिए निर्देश

हाई कोर्ट ने विदेशी घोषित किए गए लोगों से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को ट्रिब्यूनल के आदेश की जानकारी और उसकी प्रति उपलब्ध कराने तथा परिवार को आवश्यक सूचना देने जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए, ताकि व्यक्ति को उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का अवसर मिल सके।

फिलहाल मुमताज बेगम का बांग्लादेश में सटीक ठिकाना स्पष्ट नहीं है। भारतीय और बांग्लादेशी अधिकारियों के स्तर पर उन्हें तलाशने और मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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