नई दिल्ली, Action Bharat | राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद्य सुरक्षा, किसान आय, रबी फसलों की तैयारी और कृषि क्षेत्र को बाजार से जोड़ने से जुड़े मुद्दों पर राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों के साथ चर्चा की। सम्मेलन का आयोजन 28-29 सितंबर को नई दिल्ली में किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक योजना और जमीनी स्तर पर निगरानी पर जोर दिया। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बदलते मौसम, अनिश्चित बारिश और पानी की उपलब्धता जैसी चुनौतियों के बीच रबी सीजन के लिए डेटा आधारित योजना बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
10 राज्यों को ₹1,082 करोड़ की वित्तीय मंजूरी
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 10 राज्यों को कुल 1,082 करोड़ रुपये के वित्तीय स्वीकृति पत्र दिए जाने की जानकारी दी गई है।
राशि का राज्यवार विवरण इस प्रकार बताया गया है:
- पश्चिम बंगाल: ₹290 करोड़
- हरियाणा: ₹198 करोड़
- छत्तीसगढ़: ₹181 करोड़
- अरुणाचल प्रदेश: ₹154 करोड़
- बिहार: ₹114 करोड़
- कर्नाटक: ₹104 करोड़
- मिजोरम: ₹75 करोड़
- हिमाचल प्रदेश: ₹64 करोड़
- झारखंड: ₹58 करोड़
- पंजाब: ₹43 करोड़
सरकार के अनुसार, इन वित्तीय संसाधनों का उद्देश्य राज्यों में कृषि विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देना है।
पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल योजना
रबी अभियान के लिए कृषि मंत्री ने राज्यों से पानी और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल योजना तैयार करने पर जोर दिया। केंद्र सरकार के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और पानी की कमी को देखते हुए परंपरागत तरीकों के बजाय डेटा आधारित कृषि योजना की जरूरत है।
इसके साथ ही राज्यों से गुणवत्ता वाले बीजों की समय पर मांग, खरीद, उठाव और किसानों तक वितरण की पूरी व्यवस्था पहले से तैयार करने को कहा गया है।
दलहन और तिलहन की खेती पर जोर
रबी सीजन में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। खासतौर पर धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, राज्यों को रबी योजना में चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन को लेकर स्पष्ट योजना तैयार करनी है। इसके साथ ही किसानों को उनकी उपज के लिए समय पर बाजार और खरीद की व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
मिट्टी की सेहत और संतुलित उर्वरक इस्तेमाल पर जोर
कृषि क्षेत्र में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली और फसल विविधीकरण जैसे तरीकों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ खेती को भी रबी रणनीति का हिस्सा बताया है।
किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा पर जोर
सम्मेलन में पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के दायरे में लाने तथा फसल बीमा योजना के तहत पारदर्शी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (CCE) कराने पर भी जोर दिया गया।
कृषि मंत्रालय ने रियल-टाइम डेटा के आधार पर फसल की स्थिति, बाजार भाव और रोगों की निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई है।
कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा
कृषि क्षेत्र में उत्पादन के साथ पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भंडारण और बेहतर बाजार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए खरीद और विपणन व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, दालों के उत्पादन और खरीद को बढ़ावा देने के साथ भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना और निर्यात क्षमता बढ़ाना है।
रबी सीजन के लिए आगे की रणनीति
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के समापन चरण में राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ रबी मौसम की तैयारियों, उर्वरक उपलब्धता, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, दलहन एवं तिलहन मिशन, PM धन-धान्य कृषि योजना और कृषि विपणन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इन चर्चाओं के आधार पर रबी अभियान 2026 के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने की बात कृषि मंत्रालय ने कही है।
