जेफरी आर्चर: वह ब्रिटिश लेखक जिन्होंने भारतीयों को अंग्रेजी साहित्य का दीवाना बना दिया

विदेश

लंदन (Action Bharat) | मशहूर ब्रिटिश लेखक जेफरी आर्चर का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपने रोचक कथानक, सरल अंग्रेजी और पाठकों को बांधे रखने वाली शैली के कारण आर्चर ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई। भारत में उनकी लोकप्रियता खास तौर पर उल्लेखनीय रही और यहां उनके उपन्यासों के बड़ी संख्या में पाठक रहे।

 

जेफरी आर्चर ने अपने लेखन करियर में 59 रचनाएं प्रकाशित कीं, जिनमें 31 उपन्यास और सात लघुकथा संग्रह शामिल हैं। उनकी किताबों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उनकी अंग्रेजी बेहद सहज थी। भारी-भरकम शब्दावली के बजाय उन्होंने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे सामान्य पाठक भी आसानी से पढ़ और समझ सके।

भारत से था खास जुड़ाव

भारत में आर्चर की लोकप्रियता का अंदाजा उनके 2019 के जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के एक किस्से से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया था कि एक छोटा बच्चा उनके पास उनकी किताबों की नकली प्रतियां लेकर आया और उनसे पूछा कि क्या उन्हें जेफरी आर्चर की नई किताब चाहिए।

आर्चर ने बच्चे से कहा कि ‘मैं ही जेफरी आर्चर हूं।’

यह किस्सा भारत में उनकी किताबों की लोकप्रियता और उनके नाम से जुड़े पाठकीय आकर्षण को बेहद दिलचस्प तरीके से सामने रखता है।

लेखन के साथ राजनीतिक सफर भी

जेफरी आर्चर केवल लेखक ही नहीं थे, बल्कि ब्रिटेन की राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1980 के दशक में वे बेस्टसेलिंग उपन्यासकार होने के साथ मार्गरेट थैचर की कंजर्वेटिव पार्टी के डिप्टी चेयरमैन भी रहे।

हालांकि उनकी सार्वजनिक जिंदगी विवादों से भी घिरी रही। एक सेक्स स्कैंडल के बाद उनके राजनीतिक जीवन को नुकसान पहुंचा। बाद में मानहानि से जुड़े एक मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और उन्हें दो वर्ष जेल में बिताने पड़े।

लेकिन जेल का यह अनुभव आगे चलकर उनके साहित्यिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

जेल की जिंदगी बनी ‘प्रिजन डायरीज’ का आधार

जेल में बिताए समय के अनुभवों को उन्होंने ‘प्रिजन डायरीज’ के रूप में लिखा। उनकी जेल डायरी पर आधारित तीन किताबें बेस्टसेलर बनीं और उनके लेखन के एक अलग पहलू को सामने लेकर आईं।

आर्चर के लेखन में उनके जीवन के अनुभवों और कल्पना का मिश्रण दिखाई देता था। उनकी कहानियों में महत्वाकांक्षा, संघर्ष, सत्ता, रिश्ते और जीवन के उतार-चढ़ाव जैसे विषय अक्सर प्रमुख रहे।

59 रचनाओं की विरासत

आर्चर ने अपने लंबे साहित्यिक जीवन में लगातार लिखा। उनके 31 उपन्यास और सात लघुकथा संग्रह सहित कुल 59 रचनाएं प्रकाशित हुईं। उनके बाद के कुछ उपन्यासों को लेकर साहित्यिक आलोचकों ने अलग-अलग राय भी व्यक्त की, लेकिन पाठकों के बीच उनकी लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।

उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि कहानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें जटिल भाषा या अत्यधिक साहित्यिक शब्दावली की जरूरत नहीं पड़ती थी। यही कारण है कि अंग्रेजी सीखने और पढ़ने वाले भारतीय पाठकों की कई पीढ़ियों के बीच उनकी किताबें लोकप्रिय हुईं।

आखिरी उपन्यास भी बना चर्चा का विषय

जेफरी आर्चर 2024 तक हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रहे। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक लेखन जारी रखा।

उनका आखिरी उपन्यास ‘Adam and Eve’ उनकी मृत्यु के अगले दिन प्रकाशित हुआ। इस तरह उनकी साहित्यिक यात्रा का अंतिम अध्याय भी उनकी मृत्यु के तुरंत बाद प्रकाशित उनकी नई किताब के साथ पाठकों तक पहुंचा।

जेफरी आर्चर अपने पीछे सिर्फ किताबों की लंबी सूची नहीं, बल्कि ऐसे पाठकों की कई पीढ़ियां छोड़ गए हैं, जिनके लिए उनकी सहज अंग्रेजी और कहानी कहने की शैली ने अंग्रेजी साहित्य को पढ़ना आसान और दिलचस्प बनाया।

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