जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में जांच समिति की फाइनल रिपोर्ट लोकसभा में पेश, सरकारी आवास में मिली नकदी पर नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब

राष्ट्रीय

नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में कथित तौर पर मिली बेहिसाब नकदी के मामले में लोकसभा की जांच समिति की फाइनल रिपोर्ट बुधवार को सदन में पेश की गई। रिपोर्ट में समिति ने जस्टिस वर्मा को लगाए गए आरोपों के लिए दोषी ठहराया है। समिति के मुताबिक, जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास के स्टोररूम में मिली बड़ी मात्रा में नकदी के स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।

🎯 स्टोररूम में मिले थे 500 रुपये के नोट

जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रिसेंट के सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों की बड़ी और बेहिसाब रकम मिली थी। समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा यह स्पष्ट नहीं कर सके कि ये नोट वहां कैसे पहुंचे और उनका मालिक कौन था।

🎯 सामान से छेड़छाड़ पर भी सवाल

रिपोर्ट में स्टोररूम की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। समिति के अनुसार, कानूनी रूप से परिसर को सील कर जांच शुरू किए जाने से पहले स्टोररूम में रखे सामान के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसके बाद वहां मौजूद बताए गए नोटों का नहीं मिलना भी समिति के लिए एक अनसुलझा पहलू रहा।

🎯 क्या है पूरा मामला?

मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की सूचना के बाद दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे थे। आग बुझाने के दौरान स्टोररूम में जले हुए नोट मिलने की बात सामने आई थी।

घटना के बाद मामले ने न्यायपालिका और न्यायिक जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी। जस्टिस वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई और बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वह उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। विवाद के बाद उन्हें उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजा गया था।

तीन सदस्यीय समिति ने की जांच

मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी। बुधवार को रिपोर्ट सदन के पटल पर रखे जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

रिपोर्ट में नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब न मिलना और जांच से पहले स्टोररूम में कथित छेड़छाड़ जैसे बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया है।

आगे क्या?

जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है। खास तौर पर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि रिपोर्ट के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ आगे की संवैधानिक प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

एक्शन भारत न्यूज़ इस मामले से जुड़े आगे के कानूनी और संसदीय घटनाक्रम पर लगातार नजर रखेगा।

नोट: यह खबर उपलब्ध समाचार रिपोर्ट और उसमें दिए गए जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर तैयार की गई है।

 

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