नई दिल्ली। यमुना नदी में अवैध रेत खनन और नदी क्षेत्र में सड़क निर्माण से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। मामले का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे एनजीटी ने दिल्ली, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और बागपत के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है।
एनजीटी ने संबंधित जिलाधिकारियों (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
समाचार रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेकर शुरू हुई सुनवाई
यह मामला एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बाद एनजीटी के सामने आया। पीठ ने कहा कि यमुना में अवैध रेत खनन, सड़क निर्माण और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों के कई पहलुओं पर अभी और विचार किए जाने की जरूरत है।
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को ताजा नोटिस जारी करते हुए अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
चार जिलों के अधिकारियों को देना होगा जवाब
NGT के निर्देश के दायरे में मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं—
- दिल्ली
- गाजियाबाद
- गौतमबुद्धनगर
- बागपत
इन जिलों के जिलाधिकारियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध खनन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर की गई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी।
संयुक्त कार्यबल की कार्रवाई पर भी मांगी जानकारी
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए गठित संयुक्त कार्यबल से संबंधित जानकारी भी मांगी।
ट्रिब्यूनल ने विशेष रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है कि—
- संयुक्त कार्यबल का गठन कब और कैसे किया गया।
- कार्यबल की अब तक कितनी बैठकें हुईं।
- बैठकों में लिए गए फैसले क्या थे।
- बैठकों के कार्यवृत्त (Minutes) को किस तरह रिकॉर्ड और अपलोड किया गया।
- अवैध रेत खनन के खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।
- अवैध खनन रोकने के लिए मौके पर क्या कदम उठाए गए।
यमुना में सड़क निर्माण और रेत खनन पर सवाल
मामले में केवल रेत खनन ही नहीं बल्कि यमुना नदी क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर भी पर्यावरणीय सवाल उठाए गए हैं।
एनजीटी यह देखना चाहता है कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह, नदी तल, पर्यावरण और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर इन गतिविधियों का क्या प्रभाव पड़ा है और संबंधित विभागों ने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए।
अधिकारियों को देना होगा हलफनामा
NGT ने संबंधित अधिकारियों को महज मौखिक जवाब देने के बजाय हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि संबंधित प्रशासन और पुलिस को अपनी कार्रवाई और स्थिति की आधिकारिक जानकारी रिकॉर्ड पर रखनी होगी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी संकेत दिया कि पिछली सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी थी। इसलिए अब संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी विस्तार से सुना जाएगा।
15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है। तब तक संबंधित जिलों के प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट/हलफनामा दाखिल करना होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यमुना दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण नदी है। नदी क्षेत्र में अवैध खनन जैसी गतिविधियां नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में NGT की यह कार्रवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि संबंधित राज्यों और जिला प्रशासन ने अवैध खनन रोकने के लिए वास्तव में कितनी प्रभावी कार्रवाई की है।
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