Action Bharat | स्पोर्ट्स डेस्क भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के बीच भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने अपने करियर के शुरुआती दौर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जडेजा ने बताया कि घरेलू क्रिकेट में शानदार बल्लेबाजी रिकॉर्ड होने के बावजूद भारतीय टीम में उन्हें कई बार बेहद निचले क्रम में बल्लेबाजी करनी पड़ती थी। इसका असर उनके आत्मविश्वास पर भी पड़ा था।
जडेजा के मुताबिक, वह रणजी ट्रॉफी में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते थे और उनका औसत 60 से ज्यादा था, इसलिए उन्हें खुद पर भरोसा था कि वह बड़ी पारियां खेल सकते हैं। लेकिन भारतीय टीम में आने के बाद उन्हें कई बार नंबर-8 और नंबर-9 तक भेजा गया।
😔 जडेजा बोले- ‘टीम को मुझ पर भरोसा ही नहीं था’
गॉल टेस्ट के दौरान ब्रॉडकास्टर से बातचीत में जडेजा ने अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वह ड्रेसिंग रूम में पैड पहनकर बल्लेबाजी का इंतजार करते थे और उनके आगे तेज गेंदबाज बल्लेबाजी के लिए तैयार होता था, तो इससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता था।
जडेजा ने बताया कि उस समय उनके मन में सवाल उठता था कि क्या टीम को उनकी बल्लेबाजी क्षमता पर भरोसा नहीं है?
उन्होंने यह भी कहा कि कई मौकों पर वह रविचंद्रन अश्विन के बाद बल्लेबाजी करने उतरे, जबकि वह खुद घरेलू क्रिकेट में शीर्ष क्रम पर बल्लेबाजी कर चुके थे।
🏏 रणजी में नंबर-4 पर 60 से ज्यादा का औसत
जडेजा ने अपने घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन को याद करते हुए कहा कि करियर की शुरुआत में वह रणजी ट्रॉफी में नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते थे।
उनका वहां का बल्लेबाजी औसत 60 से ज्यादा था। इससे उन्हें विश्वास था कि उनमें बल्लेबाज के रूप में बड़ी पारी खेलने की क्षमता है।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी भूमिका मुख्य रूप से ऑलराउंडर की रही और टीम की जरूरत के हिसाब से उन्हें निचले क्रम में भेजा जाता रहा।
📉 नंबर-8 और नंबर-9 पर भेजे जाने से टूटा आत्मविश्वास
जडेजा ने बताया कि कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती थीं कि उन्हें नंबर-8 या नंबर-9 पर बल्लेबाजी के लिए जाना पड़ता था।
ऐसे समय में ड्रेसिंग रूम में बैठे-बैठे वह देखते थे कि उनसे पहले तेज गेंदबाज बल्लेबाजी के लिए तैयार हो रहा है। जडेजा के मुताबिक, ऐसी स्थिति से उनका मनोबल और आत्मविश्वास प्रभावित होता था।
उनके मुताबिक, वह सोचते थे कि अगर उन्हें रन बनाने हैं तो उन्हें पर्याप्त समय भी मिलना चाहिए। लगातार निचले क्रम में भेजे जाने से उनके मन में यह सवाल पैदा हुआ कि शायद टीम मैनेजमेंट को उनकी बल्लेबाजी पर पूरा विश्वास नहीं है।
🔥 समय के साथ बदली जडेजा की भूमिका
हालांकि जडेजा का करियर आगे बढ़ने के साथ तस्वीर काफी बदल गई। वह भारतीय टेस्ट टीम के सबसे महत्वपूर्ण ऑलराउंडरों में शामिल हुए और बल्ले तथा गेंद दोनों से मैच जिताने वाली पारियां खेलीं।
खास तौर पर पिछले कुछ वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी का महत्व काफी बढ़ा है। 2025 में उन्होंने 10 टेस्ट में 764 रन बनाए और उनका औसत 63.66 रहा था।
यानी जिस खिलाड़ी को शुरुआती दौर में अपने बल्लेबाजी क्रम को लेकर आत्मविश्वास की कमी महसूस हुई, वही आगे चलकर भारत की टेस्ट बल्लेबाजी का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
📊 जडेजा का टेस्ट रिकॉर्ड
जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए बल्ले और गेंद दोनों से शानदार योगदान दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वह टेस्ट क्रिकेट में 4,000 से ज्यादा रन और 300 से ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय ऑलराउंडरों में शामिल हैं।
उनकी सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपना खेल बदल सकते हैं—जरूरत पड़ने पर लंबी पारी खेलना हो या फिर महत्वपूर्ण विकेट निकालना।
🇱🇰 गॉल टेस्ट में भी जडेजा टीम का हिस्सा
जडेजा का यह खुलासा ऐसे समय आया है जब भारत श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में मजबूत स्थिति में है।
दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने 460/9 रन बना लिए थे। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रन बनाए, जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रन की तेज पारी खेली। श्रीलंका के स्पिनरों ने कुछ वापसी जरूर की, लेकिन भारतीय टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया।
📰 जडेजा के बयान का बड़ा संदेश
जडेजा की बात सिर्फ बल्लेबाजी क्रम की शिकायत नहीं बल्कि उनके करियर के उस दौर की तस्वीर दिखाती है, जब उन्हें खुद को एक भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज साबित करने के लिए लगातार इंतजार करना पड़ा।
आज वही जडेजा भारतीय टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी ऑलराउंडरों में से एक हैं। शुरुआती दौर का वह संदेह अब उनके लंबे करियर और शानदार आंकड़ों के सामने काफी पीछे छूट चुका है।
Action Bharat निष्कर्ष: जडेजा का बयान टीम मैनेजमेंट पर सीधा वर्तमान आरोप लगाने से ज्यादा उनके शुरुआती करियर के अनुभव और उस दौर में आत्मविश्वास पर पड़े असर की कहानी है। मौजूदा समय में टीम में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
