Tata की छोटी कंपनी का बड़ा दांव! ₹167 करोड़ का निवेश, बिना मोबाइल टावर चलेगा फोन

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नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी नेल्को लिमिटेड (NELCO) ने भविष्य की कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अमेरिकी फर्म Lunar Holdco, Inc. में करीब 167 करोड़ रुपये यानी 20 मिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इस साझेदारी का मकसद भारत और दक्षिण एशिया में Direct-to-Device (D2D) और IoT कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।

📡 बिना टावर के मोबाइल कनेक्टिविटी!

D2D तकनीक के जरिए भविष्य में मोबाइल फोन और दूसरे डिवाइस सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे। यानी ऐसे इलाकों में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना संभव होगा, जहां मोबाइल टावर या पारंपरिक नेटवर्क की पहुंच नहीं है।

इस तकनीक को खासतौर पर दूर-दराज के क्षेत्रों, आपदा प्रभावित इलाकों और नेटवर्क कवरेज से बाहर के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

💰 नेल्को ने कितना निवेश किया?

नेल्को के मुताबिक, कंपनी Lunar Holdco में 20 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹167 करोड़ का निवेश करेगी। यह निवेश Compulsorily Convertible Debentures (CCDs) के माध्यम से किया जाएगा।

कंपनी को इस निवेश पर 7 प्रतिशत सालाना कंपाउंडेड रिटर्न मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इस निवेश से नेल्को को Lunar Holdco पर नियंत्रण हासिल नहीं होगा।

🚀 किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

D2D और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है—

  • ऑटोमोबाइल: वाहन ट्रैकिंग और टेलीमैटिक्स
  • समुद्री क्षेत्र: समुद्र में कनेक्टिविटी
  • एनर्जी सेक्टर: दूर-दराज के ऊर्जा संयंत्रों में संचार
  • आपदा प्रबंधन: मोबाइल नेटवर्क फेल होने पर वैकल्पिक कनेक्टिविटी
  • सरकारी सेवाएं: सुरक्षित और भरोसेमंद संचार व्यवस्था
  • ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्र: जहां मोबाइल टावर की पहुंच सीमित है

🛰️ Lunar Holdco क्या करती है?

Lunar Holdco अमेरिका के डेलावेयर में स्थित कंपनी है। रिपोर्ट के मुताबिक यह Lynk Global और Omnispace के विलय से बनी है और इसे सैटेलाइट ऑपरेटर SES का समर्थन प्राप्त है।

कंपनी फिलहाल प्री-रेवेन्यू स्टेज में है। इसका कमर्शियल ऑपरेशन सैटेलाइट नेटवर्क के पूरी तरह स्थापित होने के बाद शुरू होने की उम्मीद है।

क्या बदल सकता है?

अगर D2D तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो मोबाइल कनेक्टिविटी का तरीका काफी बदल सकता है। भविष्य में किसी दूरदराज इलाके में मोबाइल टावर उपलब्ध न होने के बावजूद सैटेलाइट के जरिए फोन को कनेक्ट करना संभव हो सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा मोबाइल टावर तुरंत खत्म हो जाएंगे। D2D तकनीक पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की पूरक कनेक्टिविटी के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Action Bharat News | बिजनेस डेस्क

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