नई दिल्ली: सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसी दिन मंगला गौरी व्रत भी होने से धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।
📅 25 अगस्त को ही क्यों रखा जाएगा व्रत?
पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त की सुबह 6:20 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त की सुबह 7:59 बजे समाप्त होगी।
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 25 अगस्त को प्रदोष काल मिलने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
🕉️ पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 से 5:11 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:32 से 3:24 बजे तक
- मुख्य प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:51 बजे से रात 9:04 बजे तक
भगवान शिव की प्रदोष पूजा के लिए शाम 6:51 से रात 9:04 बजे तक का समय विशेष माना गया है।
🔱 भौम प्रदोष का क्या है महत्व?
मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ माता गौरी और हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
🌺 मंगला गौरी व्रत के साथ खास संयोग
25 अगस्त को ही मंगला गौरी व्रत भी पड़ रहा है। सावन में मंगलवार को माता गौरी की पूजा की परंपरा है। ऐसे में शिव-गौरी की आराधना के साथ भौम प्रदोष का संयोग इसे धार्मिक रूप से विशेष बनाता है।
🙏 पूजा में क्या करें?
शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करें। शिवलिंग पर जल और अपनी परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित करें तथा ॐ नमः शिवाय का जाप करें। इसके बाद माता गौरी और हनुमान जी की पूजा भी की जा सकती है।
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