नई दिल्ली: भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
🇮🇳🇯🇵 समुद्री सुरक्षा पर बड़ा समझौता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी के बीच हुई वार्ता के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार होगा।
⚓ नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग
भारत और जापान ने नौसैनिक पोतों के डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में संयुक्त संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई है।
इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है।
🛰️ खुफिया और तकनीक पर भी फोकस
दोनों देशों ने:
- खुफिया जानकारी
- रक्षा उपकरण
- सैन्य तकनीक
- रक्षा उद्योग
जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक कार्य समूह बनाने पर भी सहमति जताई है।
🌏 चीन के लिए परोक्ष संदेश?
संयुक्त बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन भारत और जापान ने बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने और नौवहन एवं हवाई मार्गों की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाली एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया।
क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए इसे चीन के लिए परोक्ष रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत और जापान दोनों दक्षिण एवं पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित रहे हैं।
🔥 हिंद-प्रशांत में नई रणनीतिक तस्वीर
यह समझौता केवल दो देशों के बीच सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। इससे हिंद-प्रशांत में भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है।
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