Javelin Missile: भारत में बनेगी अमेरिकी ‘टैंक किलर’ मिसाइल, Tata Advanced Systems ने अमेरिकी कंपनियों से किया समझौता

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नई दिल्ली। भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और अमेरिकी Javelin Joint Venture (JJV) के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में अमेरिकी Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल के उत्पादन की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

Javelin Joint Venture में अमेरिकी रक्षा कंपनियां Lockheed Martin और Raytheon शामिल हैं। समझौते का उद्देश्य भारत में Javelin All Up Round (AUR) मिसाइल के लिए अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन की क्षमता विकसित करना है।

भारत में होगी मिसाइल की फाइनल असेंबली

समझौते के तहत भारत में Javelin मिसाइल की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में मिसाइल के कई हिस्सों और सब-असेंबली का निर्माण भारत में करने की संभावनाएं भी तलाश की जाएंगी।

यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षमता बढ़ाने की नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिका में बनेंगे कुछ अहम हिस्से

समझौते के तहत Javelin मिसाइल के कुछ प्रमुख हिस्सों का उत्पादन फिलहाल अमेरिका में होगा।

Lockheed Martin की ट्रॉय, अलबामा स्थित सुविधा में सब-असेंबली किट तैयार की जाएंगी, जबकि Raytheon की टक्सन, एरिजोना स्थित सुविधा में गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट्स का उत्पादन किया जाएगा।

इसके बाद इन हिस्सों को भारत भेजकर अंतिम असेंबली और इंटीग्रेशन किए जाने की योजना है।

भारत की रक्षा जरूरतों से भी जुड़ा है समझौता

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत ने अमेरिकी Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए अमेरिका के साथ Letter of Offer and Acceptance (LOA) पर हस्ताक्षर किए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत Foreign Military Sales रूट के जरिए Javelin सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

ऐसे में भारत में ही इसके उत्पादन और असेंबली की क्षमता विकसित होने से भविष्य में सप्लाई और रखरखाव की प्रक्रिया को भी मजबूती मिल सकती है।

टाटा को क्यों चुना गया?

Javelin Joint Venture ने भारत में संभावित साझेदारों की क्षमताओं और विशेषज्ञता का आकलन करने के बाद Tata Advanced Systems को अपना पार्टनर चुना है।

TASL के साथ यह साझेदारी भारत में उच्च तकनीक वाले रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए एक बड़ा औद्योगिक आधार तैयार करने में मदद कर सकती है।

रोजगार और डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा

इस परियोजना से भारत में हाई-टेक रक्षा निर्माण से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही इससे कुशल रक्षा कार्यबल तैयार करने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक रक्षा सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

भारत में असेंबली और भविष्य में स्थानीय स्तर पर अधिक पार्ट्स के निर्माण से देश के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका

Javelin Joint Venture की ओर से कहा गया है कि यह समझौता Javelin सिस्टम की ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने की नींव तैयार करता है। इससे सहयोगी देशों के लिए सिस्टम की उपलब्धता और तैनाती की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वहीं TASL के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सुकरण सिंह के मुताबिक, यह पहल भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में जरूरी असेंबली विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी।

चीन-पाकिस्तान के संदर्भ में क्यों अहम?

Javelin एक आधुनिक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है और इसे बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। भारत में इसके उत्पादन की क्षमता विकसित होना भारतीय सेना की एंटी-आर्मर क्षमताओं और रक्षा आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि, इस समझौते को सीधे तौर पर किसी एक देश के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखना उचित नहीं होगा। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत की रक्षा निर्माण क्षमता, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

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