विधानसभा चुनाव की तैयारी में मायावती का बड़ा दांव, ‘जिताऊ के साथ टिकाऊ’ उम्मीदवारों को मिलेगा बसपा का टिकट

राजनीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को पार्टी संगठन की अहम बैठक में पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ चुनावी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और उम्मीदवारों के चयन को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए।

मायावती ने साफ कर दिया कि पार्टी टिकट देते समय केवल चुनाव जीतने की क्षमता ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार के लंबे समय तक पार्टी के साथ जुड़े रहने और संगठन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी महत्व देगी। उन्होंने इसे ‘जिताऊ के साथ टिकाऊ’ उम्मीदवार की नीति के तौर पर सामने रखा।

‘जिताऊ के साथ टिकाऊ’ को प्राथमिकता

मायावती ने प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी नेताओं से फीडबैक लिया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक माहौल में ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया जाना चाहिए जो चुनाव जीतने में सक्षम होने के साथ-साथ पार्टी के लिए टिकाऊ भी हों।

बसपा ने चुनावी तैयारियों के तहत करीब 100 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। पार्टी की योजना है कि सितंबर में यह संख्या बढ़ाकर 150 से अधिक की जा सकती है।

इससे संकेत मिलता है कि बसपा चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर उन्हें क्षेत्र में संगठन मजबूत करने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने का पर्याप्त समय देना चाहती है।

बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर

माल एवेन्यू स्थित बसपा मुख्यालय में हुई बैठक में प्रदेश, मंडल और जिलास्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। मायावती ने बूथ स्तर पर संगठन के पुनर्गठन की प्रगति की समीक्षा की।

उन्होंने पदाधिकारियों को सेक्टर स्तर पर बैठकें आयोजित कर संगठनात्मक काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। पार्टी का जोर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और प्रत्येक बूथ पर संगठन को मजबूत करने पर है।

बसपा नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के लिए केवल बड़े नेताओं के कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि बूथ स्तर तक पार्टी का नेटवर्क प्रभावी होना जरूरी है।

विरोधियों के चुनावी वादों पर मायावती का निशाना

बैठक में मायावती ने भाजपा और समाजवादी पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों के चुनावी वादों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान महिलाओं और दूसरे वर्गों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की घोषणाएं और वादे किए जाते हैं।

मायावती के मुताबिक, सरकार बनने के बाद इन वादों को पूरा नहीं किए जाने से जनता में निराशा पैदा होती है। उन्होंने खास तौर पर जेन-जी और जेन-अल्फा के सामने पैदा हो रही चुनौतियों का उल्लेख किया।

बसपा सुप्रीमो ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता को ऐसे चुनावी वादों और घोषणाओं के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि मतदाता किसी तरह के छलावे में आए बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से मतदान कर सकें।

पांचवीं बार सरकार बनाने का लक्ष्य

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत से जुटने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक हालात में विरोधी दलों के ‘साम, दाम, दंड, भेद’ जैसे हथकंडों का मुकाबला करने के लिए संगठन को पूरी तरह तैयार करना होगा।

बसपा का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में फिर से सत्ता हासिल करना है। पार्टी नेतृत्व की ओर से पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने की दिशा में संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया जा रहा है।

कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम

बैठक में बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि को लेकर भी फैसला लिया गया। मायावती ने बताया कि 9 अक्टूबर को लखनऊ में कांशीराम स्मारक स्थल पर प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

यूपी-दिल्ली सीमा पर स्थित बहुजन प्रेरणा केंद्र में फिलहाल काम चल रहा है, इसलिए इस बार कार्यक्रम कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित किया जाएगा।

मायावती के मुताबिक, 3 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय स्तर की बैठक में इस कार्यक्रम की तैयारियों और स्वरूप को लेकर विस्तार से जानकारी दी जा सकती है।

नेपाल की बाढ़ पर भी जताई चिंता

बैठक के दौरान मायावती ने नेपाल में आई बाढ़ पर भी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल राहत एवं सहायता पहुंचाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए सरकारों को तेजी से कदम उठाने चाहिए।

उमाशंकर सिंह के बेटे यूकेश बैठक में पहुंचे

बैठक में बसपा के पूर्व विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे यूकेश सिंह की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती ने कहा था कि वह लंबे समय तक उनके साथ रहे और यदि उनका परिवार चाहे तो उनके बेटे को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।

यूकेश सिंह के बैठक में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अपने पिता की विधानसभा सीट रसड़ा से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

आकाश आनंद बैठक में नहीं पहुंचे

बसपा की इस महत्वपूर्ण बैठक में मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद मौजूद नहीं रहे। उनकी गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है।

फिलहाल बसपा का पूरा फोकस संगठन के पुनर्गठन, बूथ स्तर पर मजबूती और चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन पर दिखाई दे रहा है। ‘जिताऊ के साथ टिकाऊ’ उम्मीदवारों की रणनीति के जरिए मायावती चुनावी मैदान में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने की कोशिश कर रही हैं।

खबर के मुख्य बिंदु

  • मायावती ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कीं।
  • जिताऊ के साथ टिकाऊ’ उम्मीदवारों को टिकट देने पर जोर।
  • करीब 100 उम्मीदवारों का चयन, सितंबर में संख्या 150 पार करने की तैयारी।
  • बूथ और सेक्टर स्तर पर संगठन मजबूत करने के निर्देश।
  • भाजपा-सपा के चुनावी वादों पर मायावती ने सवाल उठाए।
  • 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम।
  • उमाशंकर सिंह के बेटे यूकेश सिंह बैठक में शामिल हुए।
  • आकाश आनंद बैठक में मौजूद नहीं रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *