द्वारका के शहीद भगत सिंह अपार्टमेंट के दो फ्लैटों को बनाया निशाना; जांच में सामने आया कि एक संपत्ति पहले से गिरवी थी, दूसरी वर्षों पहले बिक चुकी थी
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में फर्जी संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) से करोड़ों रुपये का लोन हासिल करने की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मंदिर मार्ग थाना पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की कथित फर्जी कन्वेयंस डीड और अन्य संपत्ति दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करीब 1.06 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ी धोखाधड़ी की।
मामला द्वारका सेक्टर-14 स्थित शहीद भगत सिंह अपार्टमेंट के दो अलग-अलग फ्लैटों से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच, आरोपियों की भूमिका और कथित सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
दो फ्लैट, दो लोन और एक जैसा तरीका
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, कथित जालसाजों ने एक ही सोसाइटी के दो फ्लैटों को लोन के लिए इस्तेमाल किया। दोनों मामलों में संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और उनके आधार पर NBFC से लोन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
पहले मामले में हिमांशु शर्मा, उसके पिता संजय शर्मा और जतिन के नाम सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार, इन लोगों ने द्वारका सेक्टर-14 स्थित एक फ्लैट के संबंध में वर्ष 2015 की कथित DDA कन्वेयंस डीड और अन्य दस्तावेज जमा किए।
फाइनेंस कंपनी ने संपत्ति का मूल्यांकन करीब 65 लाख रुपये किया और इसके आधार पर 48.76 लाख रुपये के लोन की स्वीकृति दी गई। इसमें से करीब 34.30 लाख रुपये विक्रेता के खाते में ट्रांसफर किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
दूसरे फ्लैट पर 57.60 लाख रुपये का लोन
दूसरे मामले में इसी अपार्टमेंट के एक अन्य फ्लैट को कथित तौर पर लोन के लिए इस्तेमाल किया गया। शिकायत के अनुसार, संजय शुक्ला और उसकी मां शशिकला शुक्ला ने वर्ष 2013 की कन्वेयंस डीड के आधार पर लोन प्रक्रिया कराई।
इस मामले में कंपनी ने करीब 57.60 लाख रुपये का लोन मंजूर किया। लोन प्रक्रिया के तहत लगभग 34.90 लाख रुपये विक्रेता के खाते में ट्रांसफर किए गए।
शुरुआत में दोनों मामलों में लोन प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही, लेकिन बाद में फाइनेंस कंपनी की जांच में दस्तावेजों और संपत्तियों से जुड़ी गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
जांच में खुली दस्तावेजों की पोल
लोन जारी होने के बाद NBFC ने संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। इसी दौरान कंपनी को संदेह हुआ कि उसके सामने प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
एक मामले में जांच के दौरान पता चला कि जिस फ्लैट को लोन के लिए गिरवी बताया गया था, वह कथित तौर पर पहले से ही अन्य बैंकों के पास गिरवी रखा हुआ था। इतना ही नहीं, फ्लैट पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा होने की बात भी सामने आई। शिकायत के मुताबिक, वहां एक व्यक्ति मरम्मत का काम करा रहा था।
दूसरे मामले में जांच के दौरान पता चला कि संबंधित संपत्ति कई वर्ष पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा चुकी थी।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद कंपनी ने संपत्ति के मूल रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से मिली अहम जानकारी
मामले की जांच के दौरान सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से संपत्ति दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां हासिल की गईं। शिकायत के अनुसार, इन रिकॉर्ड की तुलना आरोपियों द्वारा NBFC के सामने प्रस्तुत दस्तावेजों से की गई तो दोनों में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया।
पुलिस के अनुसार, आधिकारिक रिकॉर्ड में जहां कुछ जानकारी हाथ से लिखी हुई थी, वहीं आरोपियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में उन्हीं प्रविष्टियों को कथित तौर पर टाइप किया गया था।
इसी आधार पर फाइनेंस कंपनी को दस्तावेजों के फर्जी होने का संदेह मजबूत हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
एक ही सोसाइटी के फ्लैटों को निशाना बनाने का आरोप
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस इस संभावना की पड़ताल कर रही है कि आरोपी किसी संगठित समूह या सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित समूह का तरीका एक जैसा था—एक ही सोसाइटी के फ्लैटों को निशाना बनाना और उनके स्वामित्व से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कर वित्तीय संस्थानों के सामने पेश करना।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस कथित नेटवर्क ने केवल इन दो संपत्तियों को निशाना बनाया या दिल्ली के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की गई है।
1.06 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला
दोनों मामलों को मिलाकर शिकायत में NBFC को करीब 1.06 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ी धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि लोन की पूरी रकम किस तरह और किन खातों में पहुंची, आरोपियों के बीच वित्तीय लेनदेन कैसे हुआ और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही।
इसके अलावा संपत्ति के वास्तविक मालिकों और संबंधित रजिस्ट्रार रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
मंदिर मार्ग थाने में FIR दर्ज
मंदिर मार्ग थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
पुलिस की जांच में अब दस्तावेज तैयार करने वालों, लोन प्रक्रिया में शामिल लोगों और कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
पुलिस के सामने अब ये बड़े सवाल
- फर्जी कन्वेयंस डीड और संपत्ति दस्तावेज किसने तैयार किए?
- NBFC में दस्तावेजों की जांच के बावजूद लोन कैसे मंजूर हुआ?
- दोनों फ्लैटों की वास्तविक स्थिति छिपाने में किसकी भूमिका थी?
- क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरीके से अन्य संपत्तियों पर लोन लिया?
- लोन की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया?
- क्या इस कथित सिंडिकेट में और लोग भी शामिल हैं?
फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के साथ आरोपियों से पूछताछ कर मामले की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
