राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले भूपेश बघेल का चंडीगढ़ दौरा, पंजाब कांग्रेस में बढ़ी हलचल; गुटबाजी साधने की होगी कोशिश

राजनीति

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को कम करने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल 7 सितंबर को चंडीगढ़ पहुंचेंगे। उनका यह दौरा संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बघेल के संभावित दो से चार दिन के दौरे में राहुल गांधी के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा के साथ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात और पार्टी के अंदर अलग-अलग खेमों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।

राहुल गांधी के दौरे से पहले क्यों महत्वपूर्ण है बघेल का दौरा?

राहुल गांधी का पंजाब दौरा सितंबर के मध्य के आसपास प्रस्तावित बताया जा रहा है। इस दौरे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।

राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले भूपेश बघेल का चंडीगढ़ पहुंचना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि वह प्रदेश संगठन की तैयारियों का जायजा लेने के साथ स्थानीय नेताओं से सीधे संवाद करेंगे।

कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान पार्टी के भीतर एकजुटता और मजबूत संगठन का संदेश जाए।

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी बनी चुनौती

पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी मतभेदों को लेकर चर्चा में रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच मतभेद की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं।

ऐसे में भूपेश बघेल के दौरे का एक अहम उद्देश्य पार्टी के अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाना और आपसी संवाद को बढ़ाना माना जा रहा है।

बघेल की कोशिश होगी कि चुनावी तैयारियों के बीच व्यक्तिगत या गुटीय मतभेद संगठन की गतिविधियों पर हावी न हों।

7 सितंबर को प्रेस वार्ता भी करेंगे बघेल

भूपेश बघेल 7 सितंबर को चंडीगढ़ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े ‘शुद्धिकरण’ मामले को लेकर प्रेस वार्ता करेंगे।

इसके अगले दिन यानी 8 सितंबर को पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन में भी उनके शामिल होने की संभावना है।

कांग्रेस के इस प्रदर्शन को केवल सरकार के खिलाफ राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में ही नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता को परखने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है।

नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की संभावना

अपने दौरे के दौरान बघेल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग स्तर पर संवाद कर सकते हैं। खास तौर पर पार्टी के भीतर अलग-अलग खेमों से जुड़े नेताओं के साथ उनकी बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे से जुड़े नेताओं के साथ बघेल की संभावित मुलाकात पर विशेष नजर रहेगी।

कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि प्रदेश संगठन में किसी भी तरह के मतभेद को चुनावी तैयारियों में बाधा बनने से पहले नियंत्रित किया जाए।

संगठन को चुनावी मोड में लाने की कवायद

बघेल का यह दौरा राहुल गांधी के कार्यक्रम की तैयारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे कांग्रेस की व्यापक संगठनात्मक रणनीति भी देखी जा रही है।

पार्टी पंजाब में अपने संगठन को सक्रिय करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने तथा सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दों को लेकर जमीनी अभियान तेज करने की तैयारी में है।

8 सितंबर का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राहुल गांधी के दौरे की तैयारियों की भी होगी समीक्षा

राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले बघेल स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसमें प्रदेश संगठन की भागीदारी, नेताओं के बीच समन्वय और कार्यक्रम की राजनीतिक रूपरेखा जैसे विषय महत्वपूर्ण रहेंगे।

कांग्रेस के लिए राहुल गांधी का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी इस दौरान पंजाब संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने की कोशिश करेगी।

क्या गुटबाजी पर लगेगा विराम?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भूपेश बघेल अपने दौरे के दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को कम करने में सफल होंगे।

पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना कांग्रेस हाईकमान के लिए बड़ी चुनौती है। यदि बघेल नेताओं के बीच संवाद और समन्वय बढ़ाने में सफल रहते हैं तो इसका असर आगामी राजनीतिक अभियानों और चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व का फोकस संगठन को मजबूत करने और राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से पहले पार्टी में एकजुटता का संदेश देने पर दिखाई दे रहा है।

News for Action Bharat | राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले भूपेश बघेल का चंडीगढ़ दौरा पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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