पटना हाईकोर्ट को मिला नया नियमित मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस वी. कामेश्वर राव संभालेंगे जिम्मेदारी

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पटना। करीब दो महीने के इंतजार के बाद पटना हाईकोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से देश के विभिन्न हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की घोषणा के दौरान जस्टिस राव का नाम भी सामने आया।

जस्टिस वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के 49वें नियमित मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनकी नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। अब उनके शपथ ग्रहण की तारीख की औपचारिक घोषणा का इंतजार है।

इस नियुक्ति के साथ पटना हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीश की कमी खत्म हो जाएगी। इससे न्यायिक प्रशासन को स्थायी नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।

11 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए थे पूर्व मुख्य न्यायाधीश

पटना हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीश का पद 11 जुलाई 2026 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुआ था।

इसके बाद वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। करीब दो महीने तक हाईकोर्ट का प्रशासनिक नेतृत्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर चलता रहा।

अब जस्टिस वी. कामेश्वर राव की नियुक्ति के बाद हाईकोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश मिलने जा रहा है।

6 अगस्त को कॉलेजियम ने की थी सिफारिश

जस्टिस कामेश्वर राव के नाम पर 6 अगस्त 2026 को हुई कॉलेजियम की बैठक में सहमति बनी थी। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

केंद्र सरकार की ओर से विभिन्न हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की जानकारी कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी।

अब जस्टिस राव के शपथ ग्रहण की तारीख का औपचारिक ऐलान होना बाकी है।

कौन हैं जस्टिस वी. कामेश्वर राव?

जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव का जन्म 7 अगस्त 1965 को आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के पोन्नामंडा गांव से जुड़े परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई।

उन्होंने वर्ष 1987 में दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1990 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद मार्च 1991 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण कराया और वकालत के क्षेत्र में कदम रखा।

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में की वकालत

वकालत के दौरान जस्टिस राव ने करीब दो दशक तक विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों में मामलों की पैरवी की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में कई मामलों में पक्ष रखा।

उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से सेवा कानून, श्रम कानून, संवैधानिक कानून, प्रशासनिक कानून और मध्यस्थता से जुड़े मामलों में रही है।

लंबे न्यायिक अनुभव और इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता के कारण उनका न्यायिक करियर विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

2010 में बने वरिष्ठ अधिवक्ता

जस्टिस राव को वर्ष 2010 में वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा दिया गया।

इसके करीब तीन साल बाद 17 अप्रैल 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। बाद में 18 मार्च 2015 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उन्होंने विभिन्न प्रकार के संवैधानिक, प्रशासनिक, सेवा और अन्य कानूनी मामलों की सुनवाई की।

2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट हुआ तबादला

वर्ष 2024 में जस्टिस वी. कामेश्वर राव का तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट कर दिया गया। वहां उन्होंने न्यायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।

मई 2025 में उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद जुलाई 2025 में वह वापस दिल्ली हाईकोर्ट लौटे।

अब केंद्र सरकार ने उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।

सेवा और श्रम कानून का अनुभव पटना में हो सकता है अहम

जस्टिस राव के न्यायिक करियर की प्रमुख विशेषताओं में सेवा और श्रम कानून से जुड़े मामलों का लंबा अनुभव शामिल है।

पटना हाईकोर्ट में राज्य सरकार के कर्मचारियों, सरकारी नियुक्तियों, सेवा शर्तों और अन्य प्रशासनिक विवादों से जुड़े मामले बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में जस्टिस राव का अनुभव न्यायिक प्रशासन और मामलों की सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

इसके अलावा संवैधानिक और प्रशासनिक कानून के क्षेत्र में उनका अनुभव भी पटना हाईकोर्ट की जिम्मेदारियों के लिए उपयोगी रहेगा।

अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे

उपलब्ध जानकारी के अनुसार जस्टिस वी. कामेश्वर राव का कार्यकाल लंबा नहीं होगा, क्योंकि वह अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

इसका मतलब है कि पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल लगभग एक वर्ष के आसपास रहेगा। इस अवधि में न्यायिक प्रशासन, लंबित मामलों और संस्थागत प्राथमिकताओं को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

अब शपथ ग्रहण की तारीख का इंतजार

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पटना हाईकोर्ट में जस्टिस वी. कामेश्वर राव के शपथ ग्रहण की तारीख का इंतजार है।

शपथ ग्रहण के बाद वह औपचारिक रूप से पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुधीर सिंह की वर्तमान जिम्मेदारी समाप्त होगी।

जस्टिस वी. कामेश्वर राव के करियर पर एक नजर

  • जन्म: 7 अगस्त 1965
  • शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय
  • बीए ऑनर्स: 1987
  • एलएलबी: 1990
  • दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण: मार्च 1991
  • वरिष्ठ अधिवक्ता: 2010
  • दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश: 17 अप्रैल 2013
  • स्थायी न्यायाधीश: 18 मार्च 2015
  • कर्नाटक हाईकोर्ट तबादला: 2024
  • कर्नाटक हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश: मई 2025
  • दिल्ली हाईकोर्ट वापसी: जुलाई 2025
  • पटना हाईकोर्ट के 49वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति: 2026
  • संभावित सेवानिवृत्ति: अगस्त 2027

पटना हाईकोर्ट को क्या मिलेगा?

नए नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से पटना हाईकोर्ट को अब कार्यवाहक व्यवस्था के बजाय स्थायी नेतृत्व मिलेगा। जस्टिस राव के प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव के साथ हाईकोर्ट के कामकाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

खास तौर पर सेवा, श्रम, संवैधानिक और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में उनका अनुभव पटना हाईकोर्ट के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, उनके कार्यकाल की वास्तविक प्राथमिकताएं और न्यायिक प्रशासन से जुड़े फैसले जिम्मेदारी संभालने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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