ब्रिक्स समिट में साझा घोषणापत्र पर सहमति, एकतरफा युद्ध के खिलाफ एकजुट हुए सदस्य देश

विदेश

नई दिल्ली (Action Bharat)। भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच साझा घोषणापत्र को लेकर आम सहमति बन गई है। इस घोषणापत्र को ‘ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र’ के नाम से शनिवार शाम जारी किया जाएगा।

घोषणापत्र में किसी एक देश को सीधे तौर पर निशाना बनाए बिना हर तरह की आक्रामकता और एकतरफा सैन्य कार्रवाई की निंदा किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों और संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण रास्ते को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाएगा।

पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच बनी सहमति

ब्रिक्स घोषणापत्र पर बनी सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच पहले मतभेद सामने आ चुके थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घोषणापत्र में ऐसी भाषा पर सहमति बनाई गई है जो किसी विशेष देश का नाम लिए बिना सभी प्रकार की आक्रामकता का विरोध करती है।

घोषणापत्र में यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मौजूदा संघर्षों को समाप्त करने का रास्ता बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से होकर गुजरता है।

भारत की कूटनीति के लिए अहम उपलब्धि

सभी सदस्य देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना भारत की अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ब्रिक्स शेरपाओं और अधिकारियों ने सम्मेलन से पहले कई दिनों तक घोषणापत्र की भाषा को लेकर बातचीत की।

सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया की स्थिति पर अलग-अलग सदस्य देशों के दृष्टिकोण को एक साझा भाषा में बदलना था। इसके बावजूद अंततः एक ऐसी भाषा पर सहमति बनाने में सफलता मिली, जिसे सभी सदस्य देशों के लिए स्वीकार्य माना गया।

मई में नहीं बन पाई थी सहमति

इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसी वर्ष मई में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान संयुक्त घोषणापत्र जारी नहीं हो सका था।

उस समय युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर ईरान और यूएई के बीच मतभेद सामने आए थे। इन मतभेदों के कारण विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका था।

ऐसे में सितंबर में शिखर सम्मेलन से पहले साझा घोषणापत्र पर आम सहमति बनना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

युद्ध और आक्रामकता के खिलाफ साझा संदेश

प्रस्तावित नई दिल्ली घोषणापत्र में किसी विशेष देश का नाम लिए बिना आक्रामकता की आलोचना करने और संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत का समर्थन करने की दिशा में सहमति बनी है।

इसका व्यापक संदेश यह है कि ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय विवादों को सैन्य टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए हल करने के पक्ष में हैं।

शी चिनफिंग पहुंचे नई दिल्ली

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब सात वर्षों में यह उनका पहला भारत दौरा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स के अन्य नेता नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

मोदी और शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर है।

इस वार्ता में भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति से भी मोदी की बातचीत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच दो सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी मुलाकात बताई गई है। बातचीत में भारत-ईरान संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।

ब्रिक्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है घोषणापत्र?

ब्रिक्स के विस्तार और वैश्विक राजनीति में समूह की बढ़ती भूमिका के बीच साझा घोषणापत्र पर सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अलग-अलग रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय परिस्थितियों वाले देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत कराना समूह के भीतर कूटनीतिक संतुलन की चुनौती को भी दर्शाता है।

नई दिल्ली घोषणापत्र के जरिए ब्रिक्स सदस्य देश वैश्विक संघर्षों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक समाधान को लेकर अपना साझा दृष्टिकोण सामने रख सकते हैं।

भारत की अध्यक्षता में इस सहमति को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले विदेश मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था। ऐसे में शिखर सम्मेलन के स्तर पर साझा घोषणापत्र पर सहमति भारत की सहमति-निर्माण वाली कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में सामने आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *