क्या AI इंसानों की जान के लिए बन सकता है खतरा? एंथ्रोपिक CEO ने जताई चिंता, पूर्व रिसर्चर के दावे से छिड़ी बहस

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Action Bharat | वॉशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के साथ इसके संभावित खतरों को लेकर बहस भी तेज हो गई है। एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या भविष्य में AI मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने भी कॉक्सन की चिंताओं से काफी हद तक सहमति जताई है।

• कॉक्सन ने किया बड़ा दावा
जैकब कॉक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि AI विकसित करने वाले कुछ लोग गंभीरता से मानते हैं कि यह तकनीक इस दशक के अंत तक पूरी मानवता को खत्म करने की क्षमता रख सकती है। उनके इस दावे के बाद AI सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस तेज हो गई।

• ‘बंद कमरों में डर व्यक्त करते हैं रिसर्चर्स’
कॉक्सन का कहना है कि कई वरिष्ठ अधिकारी और रिसर्चर्स सार्वजनिक मंचों पर AI के खतरों को लेकर संयमित बयान देते हैं, लेकिन निजी बातचीत में वे काफी गंभीर चिंताएं व्यक्त करते हैं। उन्होंने इसे मानव इतिहास में संभावित रूप से बेहद बड़ा खतरा बताया।

• एंथ्रोपिक CEO ने चिंताओं से जताई सहमति
CNN के इंटरव्यू में डारियो अमोदेई से जब पूछा गया कि क्या AI इंसानों की जान के लिए खतरा बन सकता है, तो उन्होंने कॉक्सन की चिंताओं से काफी हद तक सहमति जताई। अमोदेई ने कहा कि वह उनके विचारों से असहमत होने के मुकाबले ज्यादा सहमत हैं।

• मुद्दा सिर्फ प्रतिशत की संभावना का नहीं
अमोदेई के मुताबिक AI के खतरे को केवल 10 या 20 प्रतिशत जैसी संभावनाओं में देखने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी है कि AI इंडस्ट्री और समाज आज कौन से फैसले ले रहे हैं।

• गलत दिशा में विकास के खतरनाक परिणाम
अमोदेई का मानना है कि यदि AI का विकास सही दिशा और सुरक्षा उपायों के साथ किया जाए तो जोखिम कम किया जा सकता है। लेकिन गलत रास्ता चुनने पर इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। इसलिए तकनीक की दिशा तय करने में इंसानी निर्णय और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हैं।

• सरकारों और AI कंपनियों को मिलकर करना होगा काम
एंथ्रोपिक CEO के अनुसार AI के सुरक्षित विकास के लिए पूरी इंडस्ट्री और दुनिया भर की सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने माना कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन AI से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

• AI विकास को बहुत धीमा करने का भी खतरा
अमोदेई ने एक दूसरी दुविधा की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि यदि तकनीक के विकास की रफ्तार जरूरत से ज्यादा धीमी कर दी गई तो आशंका है कि गलत लोग इस तकनीक पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ सकता है।

• AI को बताया दोधारी तलवार
रिपोर्ट के मुताबिक, AI में एक तरफ मानव विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता है, वहीं अनियंत्रित विकास गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। यही वजह है कि AI सुरक्षा, जिम्मेदार विकास और प्रभावी नियमों को लेकर दुनिया भर में चर्चा बढ़ रही है।

फिलहाल AI से मानवता के खत्म होने का दावा एक आशंका और बहस का विषय है, कोई स्थापित तथ्य नहीं। लेकिन AI उद्योग के भीतर से उठ रही ऐसी चिंताएं इस बात पर जरूर जोर देती हैं कि तकनीक के विकास के साथ उसकी सुरक्षा और जिम्मेदारी पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।

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