दिल्ली में अपराधी गिरोहों पर ‘मिनी-मकोका’ का शिकंजा, BNS की धाराओं 111-112 के तहत 1232 गिरफ्तार

क्राइम

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने संगठित और छोटे संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 111 और 112 का इस्तेमाल बढ़ाया है। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में इन दोनों धाराओं के तहत 736 मामले दर्ज किए गए और 1,232 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में 634 मामले दर्ज हुए थे और 769 गिरफ्तारियां हुई थीं।

पुलिस अब केवल किसी एक अपराधी पर कार्रवाई करने के बजाय उसके पीछे सक्रिय पूरे आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाने पर जोर दे रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रावधानों का इस्तेमाल बड़े रंगदारी गिरोहों से लेकर शराब तस्करी जैसे छोटे आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ भी किया जा रहा है।

BNS की धारा 111 गंभीर संगठित अपराध से संबंधित है। इस धारा के तहत इस साल जनवरी से मई के बीच 166 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 122 मामले दर्ज हुए थे। गिरफ्तारियों की संख्या भी 76 से बढ़कर 333 हो गई। वहीं, मई तक 154 संगठित अपराध के मामले सुलझाए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 45 थी।

वहीं, धारा 112 छोटे संगठित अपराधों से जुड़े मामलों में लागू की जा रही है। इस धारा के तहत मामले 512 से बढ़कर 570 और गिरफ्तारियां 693 से बढ़कर 899 हो गईं। सुलझाए गए मामलों की संख्या भी 500 से बढ़कर 533 हुई। एक पुलिस अधिकारी ने धारा 112 को ‘मिनी-मकोका’ बताते हुए कहा कि इससे आपराधिक सिंडिकेट को तोड़ने में मदद मिलती है।

पुलिस के अनुसार, इन धाराओं का दायरा स्नैचिंग गिरोह, शराब तस्करी और साइबर ठगी जैसे नेटवर्क तक भी पहुंच सकता है। उदाहरण के तौर पर स्नैचिंग में शामिल लोगों के साथ चोरी किए गए मोबाइल फोन को ठिकाने लगाने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा सकती है। साइबर ठगी के मामलों में विदेशों में सक्रिय ठगी करने वालों के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने या अवैध रकम ट्रांसफर करने वाले लोगों को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है।

दिल्ली पुलिस का फोकस ऐसे आरोपितों पर भी है जो पहले कई बार जेल जा चुके हैं और बाहर आने के बाद दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल होकर कथित तौर पर गिरोह संचालित करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन धाराओं में मामला दर्ज होने से जमानत की कार्यवाही के दौरान पुलिस का पक्ष मजबूत हो सकता है और अपराधियों के बीच कानून का डर पैदा करने में मदद मिल सकती है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कई बार स्थानीय लोग आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ शिकायत करने से हिचकते हैं। ऐसे मामलों में BNS की धारा 111 और 112 के जरिए किसी एक आरोपित के बजाय उससे जुड़े पूरे आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।

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