नई दिल्ली। जिंदगी भर की कमाई लगाकर घर खरीदने के बाद अगर बिल्डर तय समय पर पजेशन नहीं देता है, तो खरीदार के सामने किराए और होम लोन की EMI का दोहरा बोझ खड़ा हो जाता है। ऐसे मामलों में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA के प्रावधान घर खरीदारों को कानूनी सुरक्षा देते हैं। खास तौर पर RERA की धारा 18 देरी से पजेशन मिलने की स्थिति में खरीदार को महत्वपूर्ण अधिकार देती है।
• RERA की धारा 18 में क्या अधिकार है: अगर बिल्डर सेल एग्रीमेंट में तय तारीख तक फ्लैट या घर का पजेशन नहीं देता है, तो खरीदार बिल्डर से जवाब मांग सकता है और RERA के तहत राहत की मांग कर सकता है।
• प्रोजेक्ट छोड़ना चाहते हैं तो रिफंड का विकल्प: अगर खरीदार देरी के कारण प्रोजेक्ट से बाहर निकलना चाहता है, तो RERA के तहत बिल्डर से जमा की गई राशि वापस मांग सकता है। स्रोत के मुताबिक, इस राशि पर निर्धारित ब्याज भी देय होता है, जिसे आम तौर पर SBI के MCLR से 2 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
• घर लेना है तो भी मिल सकता है ब्याज: यदि खरीदार प्रोजेक्ट छोड़ना नहीं चाहता और पजेशन का इंतजार करता है, तो बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज/हर्जाना देना पड़ सकता है। यह भुगतान घर की चाबी सौंपे जाने तक जारी रहने की बात स्रोत में कही गई है।
• RERA में ऑनलाइन शिकायत कैसे करें: बिल्डर के स्तर पर समाधान नहीं होने पर खरीदार अपने राज्य के RERA प्राधिकरण में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत के साथ अलॉटमेंट लेटर, बिल्डर-बायर एग्रीमेंट (BBA) और बिल्डर को किए गए भुगतान की रसीदें जैसे दस्तावेज लगाने होते हैं। स्रोत के अनुसार, शिकायत के लिए आम तौर पर ₹1,000 के आसपास फीस बताई गई है।
• वकील की मदद लेना जरूरी नहीं, लेकिन उपयोगी हो सकता है: खरीदार स्वयं भी RERA के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। हालांकि, प्रक्रिया को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट कानून के जानकार वकील की सहायता ली जा सकती है। शिकायत सही पाए जाने पर RERA बिल्डर को निर्धारित अवधि में रिफंड का आदेश दे सकता है।
ध्यान रखें: RERA में राहत आपके प्रोजेक्ट, एग्रीमेंट की शर्तों और लागू राज्य RERA के नियमों पर निर्भर कर सकती है। इसलिए किसी भी दावे या शिकायत से पहले अपने दस्तावेज और प्रोजेक्ट की RERA स्थिति जरूर जांच लें।
