नई दिल्ली | राधा अष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी यानी किशोरी जी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण इस तिथि को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
राधा अष्टमी पर पूजा का एक खास पहलू है—राधा रानी की पूजा मध्याह्न यानी दोपहर के समय करने की परंपरा। आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे राधा रानी के प्राकट्य काल से जुड़ी धार्मिक मान्यता बताई जाती है।
🌸 दोपहर में ही क्यों होती है पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर के समय हुआ था।
इसी मान्यता के आधार पर राधा अष्टमी के दिन मध्याह्न काल में किशोरी जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इसकी तुलना भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी से भी की जाती है। मान्यता है कि जिस प्रकार श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था और जन्माष्टमी पर आधी रात में विशेष पूजा होती है, उसी तरह राधा रानी के दोपहर में प्राकट्य के कारण राधा अष्टमी पर मध्याह्न पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
📅 19 सितंबर को मनाई जाएगी राधा अष्टमी
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार—
- अष्टमी तिथि शुरू: 18 सितंबर, दोपहर 1:02 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर, दोपहर 3:28 बजे
- राधा अष्टमी: 19 सितंबर 2026
- पूजा का शुभ समय: सुबह 11:12 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक
उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।
🙏 राधा अष्टमी पर कैसे करें पूजा?
राधा रानी की पूजा के साथ भक्त राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की आराधना भी कर सकते हैं।
पूजा में—
- राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें।
- भगवान को फल अर्पित करें।
- दीपक जलाकर आरती करें।
- राधा रानी से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा-कृष्ण की युगल पूजा करने से भक्त को किशोरी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
🪔 राधा अष्टमी पर दान का भी महत्व
राधा अष्टमी पर पूजा के बाद धन, वस्त्र और अन्न का दान करने की भी धार्मिक मान्यता बताई गई है।
जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना इस दिन शुभ माना जाता है। स्रोत के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक दान करने से जीवन में अभाव दूर होते हैं और धन लाभ के योग बनते हैं।
💍 शीघ्र विवाह के लिए भी मान्यता
राधा अष्टमी पर राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की पूजा, फल अर्पित करना और दीपक जलाकर आरती करना भी विशेष उपाय के रूप में बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे किशोरी जी की कृपा प्राप्त होती है और शीघ्र विवाह के योग बनने की मान्यता है।
🌺 आखिर क्या है दोपहर की पूजा का सार?
श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में प्राकट्य → जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि पूजा।
राधा रानी का दोपहर में प्राकट्य → राधा अष्टमी पर मध्याह्न पूजा।
यही राधा अष्टमी पर दोपहर में राधा रानी की पूजा किए जाने के पीछे बताई जाने वाली प्रमुख धार्मिक मान्यता है।
नोट: पूजा का समय और धार्मिक मान्यताएं पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती हैं। ऊपर दिए गए समय उसी स्रोत में उपलब्ध 2026 के विवरण के अनुसार हैं।
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