नई दिल्ली (Action Bharat) | विचाराधीन कैदी को पैरोल पर रिहा नहीं करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल के एक अधीक्षक के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। अदालत ने माना कि कैदी को पैरोल पर रिहा करने के अपने आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया, जिसके कारण अदालत के निर्देश का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका।
पैरोल पर रिहाई के आदेश का मामला
यह मामला विचाराधीन कैदी अनवर हुसैन की याचिका से जुड़ा है। हुसैन ने जेल प्रशासन द्वारा उसकी पैरोल अर्जी खारिज किए जाने को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और पैरोल पर रिहाई के निर्देश देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने की।
30 जुलाई को कोर्ट ने दिया था चार सप्ताह की पैरोल का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 जुलाई को आदेश दिया था कि अनवर हुसैन को चार सप्ताह के लिए पैरोल पर रिहा किया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि उसकी रिहाई सक्षम अधिकारी द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन होगी।
शर्तें तय नहीं हुईं, जेल में ही रहा कैदी
अदालत के आदेश के बावजूद सक्षम अधिकारी की ओर से पैरोल की शर्तें तय नहीं की गईं। इसके परिणामस्वरूप अनवर हुसैन को पैरोल पर रिहा नहीं किया गया और वह जेल में ही रहा।
हाई कोर्ट ने इस स्थिति को अपने आदेश के पालन को नाकाम करने वाला व्यवहार माना।
पांच साल से ज्यादा समय से जेल में था हुसैन
अदालत के सामने यह भी बताया गया कि अनवर हुसैन पहले ही विचाराधीन कैदी के तौर पर करीब पांच साल और पांच महीने जेल में बिता चुका था।
हाई कोर्ट ने इसी पृष्ठभूमि में पैरोल पर रिहाई के आदेश के बावजूद उसे जेल से बाहर नहीं किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया।
जेल अधीक्षक के खिलाफ अवमानना कार्यवाही
अदालत ने माना कि जेल प्रशासन की कार्रवाई के कारण कैदी की रिहाई से संबंधित न्यायालय के आदेश का प्रभावी पालन नहीं हो सका। इसके बाद हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल के संबंधित अधीक्षक के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी।
