12 वर्षों की ‘मॉडिफाइड गवर्नेंस’: डिजिटल सेवाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर तक, कैसे बदली प्रशासन की कार्यशैली

राजनीति

नई दिल्ली (Action Bharat) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में शासन और प्रशासन में आए बदलावों पर एक विस्तृत विश्लेषण सामने आया है। इसमें वित्तीय समावेशन, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं और निगरानी तंत्र को पिछले एक दशक से अधिक की शासन-यात्रा के प्रमुख पहलुओं के रूप में रेखांकित किया गया है। यह विश्लेषण प्रेम शंकर झा के लेख पर आधारित है, जो 16 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ।

4,399 दिन का लगातार कार्यकाल

17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन है। लेख के अनुसार, 10 जून 2026 को मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए और जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया। इसी अवधि में केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए।

लेख में कहा गया है कि इतने लंबे कार्यकाल का आकलन केवल अवधि के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर किया जाना चाहिए कि शासन की कार्यप्रणाली, सरकार और नागरिक के संबंध तथा विकास की प्राथमिकताओं में कितना बदलाव आया।

जनधन, आधार और मोबाइल से डिजिटल शासन तक

लेख के मुताबिक, जनधन, आधार और मोबाइल के माध्यम से वित्तीय समावेशन को शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा गया है।

सितंबर 2026 तक प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 59.21 करोड़ खाते दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। इनमें 32.98 करोड़ महिला खाताधारक हैं और खातों में कुल जमा राशि 3.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

इसी के साथ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान के विस्तार को भी प्रशासनिक बदलाव का हिस्सा बताया गया है। अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन लेनदेन और करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन का आंकड़ा लेख में दिया गया है।

सरकारी सेवाओं का डिजिटल रूपांतरण

डिजिटल इंडिया के जरिए प्रमाणपत्र, भुगतान, पहचान, कर प्रशासन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।

लेख के अनुसार, डिजिटल प्रक्रियाओं से सरकारी सेवाओं में रिकॉर्ड, निगरानी और जवाबदेही के नए आयाम जुड़े हैं। सरकार ने 2026 में डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और सेवा वितरण को शासन परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया था।

प्रगति और गति शक्ति से परियोजनाओं की निगरानी

प्रशासनिक कार्यशैली में प्रगति मंच को एक उदाहरण के रूप में पेश किया गया है। इसके जरिए केंद्र और राज्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं और लंबित मामलों की समीक्षा की जाती है।

जून 2026 में हुई 52वीं प्रगति बैठक में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की चार आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा का उल्लेख लेख में है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के जरिए सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और औद्योगिक गलियारों जैसी परियोजनाओं को एक-दूसरे से जुड़े बुनियादी ढांचे के रूप में देखने की कोशिश का उल्लेख किया गया है।

सड़क और रेलवे पर जोर

लेख में सरकारी आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वित्त वर्ष 2013-14 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में 1,46,572 किलोमीटर हुई।

वहीं चार लेन या उससे अधिक वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर बताई गई है। रेलवे विद्युतीकरण जुलाई 2026 तक 99.6 प्रतिशत तक पहुंचने का सरकारी आंकड़ा भी लेख में दिया गया है।

कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार

लेख में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत, खाद्य सुरक्षा और जनधन जैसी योजनाओं को कल्याणकारी शासन के प्रमुख हिस्सों के तौर पर बताया गया है।

सरकार के अनुसार, लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं मई 2026 तक ग्रामीण नल जल कनेक्शन 3.23 करोड़ परिवारों से बढ़कर 15.84 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का सरकारी आंकड़ा दिया गया है।

हालांकि लेख में यह भी कहा गया है कि योजनाओं का मूल्यांकन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि सुविधाओं की गुणवत्ता, निरंतरता और वास्तविक उपयोग से किया जाना चाहिए।

महिलाओं और युवाओं पर फोकस

कृषि और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता समूह और ‘लखपति दीदी’ जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है।

युवाओं के संदर्भ में स्टार्टअप इंडिया, कौशल विकास, अटल इनोवेशन मिशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नीति की प्रमुख पहलों के रूप में गिनाया गया है। सरकार के अनुसार 2025 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या दो लाख से अधिक हो चुकी थी।

GST, PLI और सेमीकंडक्टर पर जोर

अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में GST, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) को महत्वपूर्ण नीतिगत बदलावों के रूप में बताया गया है।

लेख में कहा गया है कि 2026 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी मिली थी, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है।

विकास के साथ विरासत और वैश्विक भूमिका

लेख में जी-20 की अध्यक्षता, कोविड काल में वैक्सीन मैत्री और वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी को भी इस शासन-यात्रा का हिस्सा बताया गया है।

वहीं राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं को सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और शहरी विकास से जोड़ने के प्रयास के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।

अगली चुनौती संस्थागत क्षमता की

लेख का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि 12 वर्षों के बाद अगली कसौटी केवल योजनाओं और परियोजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि संस्थागत क्षमता और उनके स्थायी प्रभाव की होगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्थानीय निकायों की क्षमता, नागरिक सेवाओं की समान पहुंच और बुनियादी ढांचे के रखरखाव जैसे मुद्दों को आने वाले समय की प्रमुख प्रशासनिक चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया गया है।

12 वर्ष की इस शासन-यात्रा में वित्तीय समावेशन, डिजिटल प्रशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं और तकनीक आधारित सेवा वितरण को प्रमुख बदलावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं आगे की चुनौती इन पहलों को मजबूत और स्थायी संस्थागत व्यवस्था में बदलने की होगी। लेख के अनुसार, शासन में बदलाव का अंतिम आकलन इस बात से होना चाहिए कि उसका प्रभाव नागरिकों के जीवन में कितना स्थायी दिखाई देता है।

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