रियाद (Action Bharat) | मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर CNN की एक जांच में रूस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 14 रूसी जासूसी सैटेलाइट अमेरिकी सैन्य ठिकानों के ऊपर से गुजरे थे और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इनसे जुटाई गई कुछ खुफिया जानकारी ईरान तक पहुंचाई गई हो सकती है।
प्रिंस सुल्तान एयर बेस के ऊपर से गुजरे 14 सैटेलाइट
CNN के विश्लेषण के मुताबिक, 27 मार्च के ईरानी हमले से दो दिन पहले रूस के 14 जासूसी सैटेलाइट प्रिंस सुल्तान एयर बेस के ऊपर से गुजरे थे।
इनमें Kosmos 2573 भी शामिल था। CNN ने सैटेलाइट की कक्षीय गतिविधियों का विश्लेषण अंतरिक्ष तकनीक विशेषज्ञों की मदद से किया। रिपोर्ट के मुताबिक इन सैटेलाइटों में अलग-अलग प्रकार की खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताएं थीं।
कैसे जुटाई जा सकती थी खुफिया जानकारी?
CNN के अनुसार, इन 14 सैटेलाइटों में अलग-अलग तकनीकों वाले सिस्टम शामिल थे—
- एक सैटेलाइट हाई-रिजॉल्यूशन सैन्य तस्वीरें लेने में सक्षम था।
- 8 सैटेलाइट रेडियो और रडार सिग्नल पकड़ने में सक्षम बताए गए।
- 2 इंफ्रारेड सैटेलाइट गर्मी के संकेतों से मिसाइल लॉन्चर जैसी वस्तुओं की पहचान कर सकते थे।
- 3 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट बादलों और अंधेरे में भी सतह की जानकारी जुटाने और भौतिक बदलावों की पहचान करने में सक्षम बताए गए।
27 मार्च के हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल
27 मार्च को ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया था। रिपोर्टों के मुताबिक इस हमले में 12 अमेरिकी सैन्यकर्मी घायल हुए और अमेरिकी वायुसेना का एक E-3 Sentry AWACS विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ।
CNN से बात करने वाले अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रूसी जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस के बिना हमले में हासिल की गई सटीकता मुश्किल होती। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट है कि उपलब्ध जानकारी से हर हमले को सीधे रूसी खुफिया सहायता से जोड़ना संभव नहीं है।
CIA सुविधा भी रही निशाने पर
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को संदेह है कि रूसी सैटेलाइटों से मिली जानकारी का इस्तेमाल युद्ध के दौरान अन्य मौकों पर भी हुआ हो सकता है। इसमें सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद एक CIA सुविधा को निशाना बनाए जाने की घटना भी शामिल है।
रूस की भूमिका पर पहले भी उठे थे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब रूस पर ईरान को अमेरिकी ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप सामने आया हो। मार्च में CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया था कि रूस अमेरिकी सैनिकों और सैन्य संपत्तियों की स्थिति से जुड़ी जानकारी ईरान के साथ साझा कर रहा था। उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि उस खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किसी विशेष हमले में हुआ था या नहीं।
क्या रूस ने सीधे ईरान को जानकारी दी?
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि CNN को रूसी सैटेलाइटों से ली गई वास्तविक तस्वीरों तक पहुंच नहीं मिली। रिपोर्ट मुख्य रूप से सैटेलाइटों के ऑर्बिटल डेटा, अमेरिकी अधिकारियों की जानकारी और विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने खुफिया जानकारी ईरान तक पहुंचने के संबंध में दावा किया है, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री से इसकी पूरी श्रृंखला स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होती।
रूस की संभावित रणनीतिक भूमिका पर चर्चा
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने रूस की अंतरिक्ष और खुफिया क्षमताओं को अमेरिका-ईरान संघर्ष के व्यापक संदर्भ में देखा है। रूस और ईरान के बीच सैन्य एवं तकनीकी सहयोग पहले से रहा है, लेकिन यदि रूसी सैटेलाइट इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों की टार्गेटिंग में हुआ है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।
