नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर दाखिल अपीलों के निपटारे की स्थिति पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को अहम जानकारी दी है। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने से जुड़े 37 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि SIR से संबंधित आदेशों के खिलाफ कुल 38,20,683 अपीलें दायर की गई थीं। इनमें से अब तक केवल 1,02,231 अपीलों का निपटारा हो सका है, जबकि 37,18,452 मामले अभी लंबित हैं।
यह जवाब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दाखिल किया गया। मामला SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर दावों और आपत्तियों तथा उनके विधानसभा क्षेत्रवार डेटा से जुड़ा है।
नाम जोड़ने और हटाने को लेकर कितनी आपत्तियां?
आयोग के हलफनामे में यह अलग-अलग आंकड़ा नहीं दिया गया कि लंबित अपीलों में कितनी अपीलें मतदाता के नाम हटाए जाने के खिलाफ हैं और कितनी अपीलें नए नाम जोड़े जाने के विरोध में हैं।
वहीं, दावे और आपत्तियों के चरण में नाम शामिल करने के लिए 9.64 लाख आवेदन और नाम हटाने के लिए 99,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 1.82 लाख नए नाम जोड़े गए।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-6 के तहत 34.13 लाख नए आवेदन भी प्राप्त हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध निपटारे पर दिया जोर
इससे पहले 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को SIR से जुड़ी अपीलों के लंबित रहने और उनके निपटारे का पूरा विवरण पेश करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि इन अपीलों का फैसला समयबद्ध तरीके से किया जाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से यह भी पूछा था कि लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और इसके लिए कितने अतिरिक्त न्यायाधिकरणों की आवश्यकता है।
19 न्यायाधिकरणों का गठन
लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों के त्वरित निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल के साथ ओडिशा और झारखंड से करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपीलों की सुनवाई और निर्णय के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरणों का गठन किया।
फिलहाल चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 38.20 लाख से अधिक अपीलों में से करीब 1.02 लाख का निपटारा हुआ है, जबकि 37.18 लाख से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं।
